क्या कौशाम्बी से चंदनबाला चम्पापुरी लौट आई थी
संक्षेप में – जैन परम्परा की जो प्रमुख कथाएँ और ग्रन्थ मिलते हैं, उनमें स्पष्ट रूप से कहीं नहीं लिखा कि चन्दनबाला कौशाम्बी से वापस चम्पापुरी लौट कर वहाँ रहने लगी हो।
कथा का क्रम आम तौर पर इतना ही बताया जाता है:
- वह चम्पा (चम्पापुरी) की राजकुमारी वसुमती थी।
- युद्ध के बाद पकड़ी गयी, कौशाम्बी लाई गयी और वहीं सेठ धनवाह के यहाँ दासी के रूप में रही।
- कौशाम्बी में ही भगवान महावीर को आहार (भिक्षा) दिया, जिससे उनका तेरह अभिग्रह का पारणा हुआ।
- बाद में भगवान महावीर के केवलज्ञान के बाद वह दीक्षा लेकर महासती चन्दना / चन्दनबाला, और साध्वियों की प्रमुख बनी।
कहीं‑कहीं कथाओं में यह आता है कि उसकी पहचान राजा आदि को हो गयी, या उसे सम्मान मिला; लेकिन शास्त्रीय/प्रमुख जैन साहित्य में “वह फिर चम्पापुरी लौट कर वहीं बस गयी” – ऐसा स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।
इसलिए परम्परागत जैन दृष्टि से इतना ही कहना उचित है कि उसका मुख्य जीवन‑पथ कौशाम्बी से आगे दीक्षा और साध्वी‑जीवन से जुड़ा बताया गया है, न कि पुनः चम्पापुरी में लौटा कर सांसारिक जीवन जीने से।