Jain drishti se
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“Jain dṛiṣṭi se” का मतलब होता है – किसी भी बात को जैन धर्म की दृष्टि से समझना:
- क्या यह हिंसा है या अहिंसा?
- राग–द्वेष बढ़ता है या घटता है?
- कर्म बंधन होगा या निर्जरा?
- सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र की दिशा में ले जाता है या नहीं?
यानी चीज़ों को सिर्फ दुनियावी सही–गलत से नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और कर्म सिद्धांत को ध्यान में रखकर देखना – इसी को “Jain drishti se dekhna” कहते हैं।
आप जिसे भी “Jain drishti se” समझना चाहते हैं (जैसे – व्यवसाय, प्रेम, क्रोध, भोजन, परिवार, शिक्षा, धन आदि) उस विषय का नाम लिखिए, मैं उसे जैन दृष्टि से सरल भाषा में समझा दूँगा।