मेरी निर्वाण भूमि कौशांबी नगरी है ये किस ने कहा था in jain agam
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जैन आगम / परंपरागत जैन ग्रंथों के अनुसार ऐसा वाक्य “मेरी निर्वाण भूमि कौशांबी नगरी है” किसी तीर्थंकर या गणधर का प्रसिद्ध, अधिकृत उद्धरण के रूप में नहीं मिलता।
जैन सिद्धांत में:
- कौशांबी (कौशाम्बी) – यह
- २४ तीर्थंकरों की जन्म–भूमि और निर्वाण–भूमि की जो सूचियाँ आगमिक–पुराणिक ग्रंथों में आती हैं, उनमें भी किसी का निर्वाण कौशांबी में नहीं बताया गया।
इसलिए दो बातें साफ हैं:
- इस तरह का वाक्य “मेरी निर्वाण भूमि कौशांबी नगरी है” जैन आगम का प्रचलित वचन नहीं है;
- संभव है किसी ने जन्मभूमि (कौशांबी) और निर्वाण–भूमि (सम्मेद शिखर) को ग़लत ढंग से जोड़कर ऐसा वाक्य बना दिया हो।
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