Jeevo ke sankhya konse jineshwar ne bataye arihant mahaveer
जीवों की संख्या के विषय में अरिहंत भगवान महावीर स्वामी ने विस्तार से बताया है। भगवान महावीर ने जीवों को मुख्यतः ८४ लाख योनियों (८.४ मिलियन प्रकार) में बाँटा है, और उन्हें एकेन्द्रिय (एक इन्द्रिय वाले) से लेकर पंचेन्द्रिय (पाँच इन्द्रिय वाले) तक वर्गीकृत किया है।
जीवों की संख्या का वर्गीकरण: महावीर स्वामी ने बताया कि संसार में अनन्त जीव हैं, परंतु वे विभिन्न योनियों में भ्रमण करते रहते हैं। ये जीव १४ वर्गों (चौदह जीव-समुदाय) में विभाजित हैं:
- एकेन्द्रिय (जैसे – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति जीव)
- द्वि, त्रि, चतुर और पंचेन्द्रिय (कीट, पक्षी, पशु, मनुष्य आदि)
प्रमुख ग्रंथ: भगवान महावीर के उपदेशों का संकलन 'आचारांग सूत्र', 'सूतकृतांग सूत्र', और 'तत्त्वार्थ सूत्र' (आचार्य उमास्वाती द्वारा) में मिलता है, जिसमें इन जीवों का विस्तार से वर्णन है।
संक्षेप में: जीवों की अनन्तता और उनकी विभिन्न योनियों की संख्या का वर्णन जैनागम और तत्त्वार्थ सूत्र (पंचम अध्याय) में मिलता है, और यह ज्ञान भगवान महावीर स्वामी ने ही प्रतिपादित किया है।
स्रोत:
- तत्त्वार्थ सूत्र (तत्त्वार्थाधिगम सूत्र), पंचम अध्याय
- आचारांग सूत्र
- जैन तत्त्वज्ञान
निष्कर्ष: जीवों की संख्या और उनके प्रकार का विस्तृत ज्ञान भगवान महावीर स्वामी (अरिहंत) ने दिया है।