Bina dandak ke jeev kitne a se batao
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जैन धर्म के अनुसार, जीवों (सजीवों) को उनके इंद्रियों (sense organs) के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। "बिना दंडक के जीव" का अर्थ है वे जीव जिनके पास रीढ़ की हड्डी (spinal cord) या दंडक नहीं होती।
जैन दर्शन में, एकेन्द्रिय जीव (एक इन्द्रिय वाले जीव) — जैसे पृथ्वी-काय, जल-काय, अग्नि-काय, वायु-काय और वनस्पति-काय — ये सब बिना दंडक (रीढ़ की हड्डी) के जीव माने जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- पृथ्वी-काय (Earth-bodied beings)
- जल-काय (Water-bodied beings)
- अग्नि-काय (Fire-bodied beings)
- वायु-काय (Air-bodied beings)
- वनस्पति-काय (Plant-bodied beings)
ये सभी एकेन्द्रिय जीव "बिना दंडक के जीव" हैं। इसके अलावा, दो, तीन, और चार इन्द्रिय वाले जीव — जैसे की कीड़े, लार्वा, आदि — भी बिना दंडक के हो सकते हैं।
संक्षेप में: बिना दंडक (रीढ़ की हड्डी) के जीव — एकेन्द्रिय, द्वीन्द्रिय, त्रैन्द्रिय, और चतुरेन्द्रिय जीव — जो कि सूक्ष्म होते हैं, वे सभी बिना दंडक के जीव कहलाते हैं।