SAMAIK LEVANU SUTRA
“Samaik levanu sutra” (सामायिक लेने का सूत्र) generally means the short Prakrit sutra recited to start Samayik. In most Śvetāmbara traditions, this is done by reciting “Icchāmi Thāmi Kaussaggam” (इच्छामि ठामि काउस्सग्गं), which is treated as the main samayik levanu sutra.
Original Sutra (Icchami Thami – Samaik levanu)
इच्छामि ठामि काउस्सग्गं, जो मे देवसिओ अइयारो कओ, काइओ, वाइओ, माणसिओ, उस्सुत्तो, उम्मग्गो, अकप्पो, अकरणिज्जो, दुज्झाओ, दुव्विचिंतिओ, अणायारो, अणिच्छिअव्वो, असावग‑पाउग्गो, नाणे, दंसणे, चरित्ता‑चरित्ते, सुए, सामाइए, तिण्हं गुत्तीणं, चउण्हं कसायाणं, पंचण्ह‑मणुव्वयाणं, तिण्हं गुण‑व्वयाणं, चउण्हं सिक्खा‑वयाणं, बारस‑विहस्स सावग‑धम्मस्स, जं खंडिअं जं विराहिअं, तस्स मिच्छा मि दुक्कडं ॥१॥
(Also pronounced slightly differently in some regions; essence remains same.)
सरल अर्थ (Meaning in simple words)
- “मैं काउस्सग्ग (कायोत्सर्ग / ध्यान‑स्थिति) में स्थिर होना चाहता/चाहती हूँ।
- आज जो भी दोष मैंने किए हैं –
- ज्ञान, दर्शन, चरित्र, शास्त्र, समायिक,
अर्थात – “हे जिनेन्द्र! मैं अभी समायिक में स्थिर होना चाहता/चाहती हूँ और आज दिन भर में गृहस्थ के बारह व्रतों व नियमों के विषय में जो भी भूल‑चूक हुई हो, उन्हें स्वीकार करता/करती हूँ, और प्रार्थना करता/करती हूँ कि वे सब दोष क्षम्य हों और उनका फल मुझ पर न लगे।”
परम्परा (Digambar / Śvetāmbara)
- Śvetāmbara गृहस्थों में यही “इच्छामि ठामि काउस्सग्गं…” को ही प्रायः समायिक लेने का सूत्र माना जाता है।
- Digambar परम्परा में समायिक की विधि, सूत्र और भाषा थोड़ी भिन्न हो सकती है, पर भाव वही है –
आप चाहें तो इसी सूत्र को तीन बार श्रद्धा से बोलकर, शांत बैठकर 48 मिनट (एक मुहूर्त) की समायिक कर सकते हैं – बीच में जप, स्तवन, स्वाध्याय, या शुद्ध ध्यान रखा जाता है।