Bina dandak ke jeev kya alap hsi
जैन धर्म के अनुसार, बिना दंडक (अर्थात् बिना रीढ़ की हड्डी या कठोर आवरण के) जीवों को एकेन्द्रिय जीवों में गिना जाता है। ये जीव केवल एक इन्द्रिय (स्पर्श) के होते हैं। इन्हें मुख्यतः पाँच वर्गों में बाँटा गया है:
- पृथ्वी काय (मिट्टी, पत्थर आदि में रहने वाले सूक्ष्म जीव)
- अप् काय (जल में रहने वाले जीव)
- तेजस काय (अग्नि में रहने वाले जीव)
- वायु काय (हवा में रहने वाले जीव)
- वनस्पति काय (वनस्पति, पौधे, पेड़-पौधों के जीव)
इन जीवों में दंडक (रीढ़ या हड्डी) नहीं होती और ये अत्यंत सूक्ष्म होते हैं। इन्हें "सामान्य निगोद" भी कहा जाता है, जो सबसे अल्प हंस (हंस = जीवन शक्ति) वाले माने गए हैं। जैन दर्शन में ऐसे जीवों की रक्षा करने और उनसे अहिंसा का पालन करने पर बहुत बल दिया गया है।