चतुर मास प्रारंभ व समाप्त होने की तिथियां
चातुर्मास की तिथियाँ हर साल बदलती हैं, क्योंकि ये चाँद (चांद्र‑पंचांग) के अनुसार तय होती हैं, न कि अंग्रेज़ी (ग्रेगोरियन) कैलेंडर से।
संक्षेप में नियम यह है:
- आरंभ (प्रारंभ) की तिथि
- चातुर्मास आम तौर पर आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी/हरि‑शयनी एकादशी) से शुरू माना जाता है। - कुछ परम्पराओं में इसका प्रारंभ गुरु‑पूर्णिमा (आषाढ़ पूर्णिमा) से भी माना जाता है, पर साधु‑साध्वी के “स्थिर रहने” वाला चातुर्मास प्रायः देवशयनी एकादशी से ही गिना जाता है।
- समाप्त (समापन) की तिथि
- चातुर्मास का समापन सामान्यतः कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी/प्रबोधिनी एकादशी) के आसपास माना जाता है। - कुछ स्थानों पर कार्तिक पूर्णिमा तक इसे बढ़ा कर माना जाता है (स्थानीय परम्परा पर निर्भर है)।
- क्यों बदलती हैं तिथियाँ?
- क्योंकि “आषाढ़ शुक्ल एकादशी” और “कार्तिक शुक्ल एकादशी” हर साल अंग्रेज़ी कैलेंडर में अलग–अलग तारीख़ पर पड़ती हैं। - इसलिए यदि आपको किसी विशेष साल (जैसे 2026, 2027 आदि) की सही तिथियाँ चाहिए हों, तो उसी वर्ष का जैन पंचांग / जैन कॅलेंडर देखना ज़रूरी है, या अपने स्थानीय जैन संघ/मंदिर से पूछना चाहिए।
- परम्परा के अनुसार छोटा फर्क
- श्वेताम्बर व दिगम्बर – दोनों में मुख्य आधार यही चार महीने (बरसात का समय) ही हैं, पर - साधु‑साध्वी कहाँ से कहाँ तक “स्थिर चातुर्मास” में रहेंगे - लोक में कौन‑सी तिथि से अधिक संयम शुरू माने जाते हैं इन बिंदुओं में थोड़ी स्थानीय/संघ अनुसार भिन्नता मिल सकती है।
सार:
- शुरू – आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन से
- समाप्त – कार्तिक शुक्ल एकादशी (या कुछ स्थानों पर कार्तिक पूर्णिमा) के दिन के आसपास।