diya ki vati chuhe ko le jaate waqt kisko shetrunjay ka udhar ka vichaar aaya
आपका प्रश्न "Diya ki vati chuhe ko le jaate waqt kisko Shetrunjay ka udhar ka vichaar aaya" जैन कथाओं से संबंधित है। इस संदर्भ में एक प्रसिद्ध कथा है:
एक बार एक साध्वी (जैन साध्वी) रात्रि के समय पूजा करने के लिए दीपक जलाने जा रही थीं। दीपक की बाती (वाती) उन्होंने रखी, लेकिन एक चूहा वह बाती ले गया। उसी समय साध्वी को शत्रुंजय (शे़त्रुंजय) तीर्थ के ऋण (उधार) का स्मरण हुआ। इस प्रसंग का उल्लेख जैन साहित्य में मिलता है, जिसमें कहा गया है कि साध्वी को अपने पूर्व जन्म के Shetrunjay तीर्थ यात्रा के ऋण का स्मरण चूहे द्वारा बाती ले जाने के समय आया था।
यह कथा कर्म के सिद्धांत और पूर्व जन्म के ऋण के स्मरण की ओर संकेत करती है। जैन दर्शन में तीर्थ यात्रा का ऋण (उधार) चुकाने की महत्ता को बताया गया है।
सारांश: दीया की बाती चूहा ले गया, उसी समय साध्वी को शत्रुंजय तीर्थ के उधार का विचार आया था।
यदि आपको इस कथा का विस्तृत वर्णन चाहिए या इससे संबंधित और जानकारी चाहिए, कृपया बताएं।