Pandava pujit shri munisuvrat swaami
“पाण्डव पूजित श्री मुनिसुव्रत स्वामी” यह एक बहुत प्रसिद्ध जिनस्तवन / भक्ति-पंक्ति है।
संक्षिप्त अर्थ (सरल भाषा में):
- “पाण्डव पूजित” = जिनकी पूजा पाण्डवों ने की थी।
- “श्री मुनिसुव्रत स्वामी” = भगवान मुनिसुव्रतनाथ, जो जैन धर्म के बीसवें तीर्थंकर हैं।
इस पंक्ति में भक्त भगवान मुनिसुव्रत स्वामी की महिमा गाते हुए यह बताते हैं कि इतने महान भगवान हैं कि महाभारत के वीर पाण्डवों ने भी उनकी भक्ति व पूजा की। इससे भगवान की प्राचीनता, महिमा और प्रतिष्ठा प्रकट होती है, और शिष्य में श्रद्धा बढ़ाने का उद्देश्य रहता है।
भगवान मुनिसुव्रत स्वामी के बारे में संक्षेप में
- 24 तीर्थंकरों में 20वें तीर्थंकर
- शुभ लक्षण: उनका लाञ्छन (चिन्ह) कच्छप / कछुआ माना जाता है
- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह जैसे व्रतों पर विशेष जोर
- जिनकी भक्ति से जीव अपने कषाय कम करके सम्यक दर्शन–ज्ञान–चारित्र की ओर बढ़ सकता है
आप चाहें तो इसी भाव से रोज़ प्रार्थना कर सकते हैं: “हे पाण्डव पूजित श्री मुनिसुव्रत स्वामी! हमारे भीतर भी अहिंसा, सत्य और त्याग की भावना जागृत हो।”
मुनिसुव्रत स्वामी से जुड़े अनेक जैन मंदिरों की जानकारी के लिए आप यहाँ देख सकते हैं