Sidhha va mokhsha
“सिद्ध” और “मोक्ष” – दोनों शब्द बहुत जुड़े हुए हैं, पर अर्थ में थोड़ा अंतर है:
- मोक्ष (Moksha)
- आत्मा पर लगे हुए सभी कर्मों का पूर्ण नाश हो जाना। - फिर उस आत्मा का जन्म‑मरण का चक्र सदा के लिए समाप्त हो जाता है। - इसे ही कर्म‑बंधन से पूरी तरह मुक्त हो जाना भी कहते हैं।
- सिद्ध (Siddha)
- वह आत्मा जिसने मोक्ष प्राप्त कर लिया हो, उसे “सिद्ध” कहते हैं। - सिद्ध आत्मा अब संसार में वापस जन्म नहीं लेती, न शरीर, न सुख‑दुःख, न राग‑द्वेष। - वह सदा के लिए सिद्धशिला (लोक के शिखर भाग) में स्थित रहती है।
- सीधा सम्बन्ध
- मोक्ष = मुक्ति की अवस्था (liberation) - सिद्ध = वह मुक्त आत्मा जिसने मोक्ष पा लिया है
जैन दृष्टि से कहें तो: “मोक्ष की प्राप्ति के बाद आत्मा सिद्ध बन जाती है।” इसलिए “सिद्ध अवस्था” और “मोक्ष अवस्था” एक ही परम‑पवित्र स्थिति के दो नाम माने जा सकते हैं, बस देखने का दृष्टिकोण अलग है।