Fourteen dreams of mother trishala in hindi
माता त्रिशला के चौदह स्वप्न (श्वेताम्बर परम्परा) हिन्दी में इस प्रकार माने जाते हैं:
- हाथी (ऐरावत हाथी)
- बैल / वृषभ
- सिंह
- देवी लक्ष्मी (सोने के सिंहासन पर बैठी, हाथ में कमल)
- माला (सुन्दर, कीमती रत्नों की माला)
- पूर्णिमा का चन्द्रमा
- सूर्य
- ध्वज / ध्वजा (झंडा)
- कलश (जल से भरा, सुशोभित कलश)
- कमल-सर (कमलों से भरा मनोहर सरोवर)
- महासागर (शांत एवं भव्य समुद्र)
- देव-विमान / दिव्य रथ
- रत्नों का भंडार (रत्नों का बड़ा ढेर)
- निर्लोम अग्नि (बिना धुएँ की शान्त, प्रकाशमान अग्नि)
मतभेद का संक्षिप्त उल्लेख (बहुत सरल भाषा में):
- श्वेताम्बर परम्परा – ऊपर के ये 14 स्वप्न मानती है।
- दिगम्बर परम्परा – इन्हीं के साथ दो और स्वप्न जोड़कर कुल 16 बताती है:
इन सभी स्वप्नों का अर्थ यही है कि माता के गर्भ में जो बालक है, वह महान आत्मा, तीर्थंकर होने वाला है – जो अनन्त जीवों को मोक्षमार्ग दिखाएगा।