Jain shashwat tirth
“Shashwat Tirth” का सरल अर्थ है – ऐसा तीर्थ जो सदा‑सदा के लिए पवित्र और महत्त्वपूर्ण माना जाता है, समय के बदलने से जिसका महत्त्व समाप्त नहीं होता।
जैन परम्परा में सामान्य रूप से 5 मुख्य “शाश्वत तीर्थ” माने जाते हैं:
- शत्रुंजय पर्वत (पालिताना, गुजरात)
- सम्बंध: भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) - महत्त्व: अनगिनत सिद्धों की मोक्ष‑भूमि, अनेक तीर्थंकरों का उपदेश‑स्थल; “तीर्थाधिराज” कहा जाता है।
- सम्मेद शिखरजी (झारखण्ड)
- सम्बंध: 24 में से 20 तीर्थंकरों का मोक्ष यहाँ हुआ। - महत्त्व: रुषभदेव, नेमिनाथ और महावीर को छोड़कर अधिकांश तीर्थंकरों की मोक्ष‑भूमि।
- गिरनार पर्वत (गुजरात)
- सम्बंध: भगवान नेमिनाथ (22वें तीर्थंकर) - महत्त्व: यहाँ नेमिनाथ प्रभु ने दीक्षा ली, केवलज्ञान पाया और यहीं से मोक्ष गए।
- अरबुदाचल / माउंट आबू (राजस्थान)
- सम्बंध: भगवान महावीर सहित अनेक साधुओं की तप‑भूमि। - महत्त्व: प्राचीन तप‑स्थल और प्रसिद्ध जैन मंदिरों (जैसे दिलवाड़ा) के कारण अत्यन्त पवित्र तीर्थ।
- अष्टापद (हिमालय क्षेत्र, स्थान निश्चित नहीं)
- सम्बंध: परम्परा के अनुसार, यहाँ भगवान ऋषभदेव मोक्ष गए। - महत्त्व: ऋषभदेव की मोक्ष‑भूमि के रूप में अत्यन्त पूज्य; आज इसका भौतिक स्थान निश्चय से ज्ञात नहीं, पर आध्यात्मिक महत्त्व शाश्वत माना जाता है।
इन पाँचों को जैन धर्म में प्रमुख शाश्वत तीर्थ माना जाता है। कुछ परम्पराओं में अन्य स्थानों को भी बहुत महत्त्व दिया जाता है, परन्तु सामान्य रूप से यही पाँच सबसे अधिक स्वीकृत हैं।