4th आरा में किसका तलाक हुआ था in jainism
जैन दर्शन में “आरा” (काल के 6 भाग) तो वर्णित हैं, लेकिन किसी विशेष व्यक्ति का “तलाक” 4th आरा में हुआ – ऐसा कोई सिद्धान्त, प्रसंग या नियम शास्त्रों में नहीं मिलता।
कुछ स्पष्ट बातें:
- 4th आरा = “दु:समा‑सुसमा काल” (Dukhama‑Sukhama) कहलाता है।
- यह एक बहुत लम्बा समय‑काल है जिसमें सुख कम और दुःख अधिक होता है, परन्तु धर्म, तीर्थंकर आदि अभी भी रहते हैं (हमारा 24 तीर्थंकरों का काल 3rd–4th आरा के आसपास आता है)। ( jainknowledge.com)
- लेकिन “किसका तलाक हुआ?” जैसा कोई प्रश्न न तो कालचक्र के सिद्धान्त से सम्बन्धित है, न ही कहीं आगमों/प्रमुख ग्रन्थों में इस प्रकार का कोई उदाहरण 4th आरा के नाम से जोड़ा गया है।
इसलिए सीधे उत्तर में:
जैन शास्त्रों के अनुसार 4th आरा में किसी विशेष व्यक्ति का ‘तलाक’ हुआ था – ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता। शायद यह कोई मज़ाक, पहेली या सोशल‑मीडिया वाला प्रश्न है, पर यह प्रामाणिक जैन सिद्धान्त पर आधारित नहीं है।
4th–5th आरा व कालचक्र के बारे में सरल विवरण यहाँ पढ़ सकते हैं: