चौद पूर्व धर
“चौदह पूर्वधर” (या बोलचाल में “चौद पूर्व धर”) जैन धर्म में उस महात्मा / साधु को कहा जाता है:
- जिसने जैन आगम के सभी १४ “पूर्व” (Purva) का
“पूर्व” क्या हैं?
- “पूर्व” प्राचीन जैन आगमों का सबसे प्राचीन, गूढ़ और विशाल भाग था।
- इनकी कुल संख्या १४ थी, इसलिए जो इन्हें पूर्ण रूप से जानता था, वह “चौदह पूर्वधर” कहलाता था।
महत्त्व:
- चौदह पूर्वों का ज्ञान अत्यन्त कठिन माना जाता था।
- जैन परम्परा के अनुसार, कालान्तर में यह सब ज्ञान धीरे‑धीरे लुप्त हो गया।
- प्रचलित मान्यता है कि अन्तिम चौदह पूर्वधर – आचार्य भद्रबाहु स्वामी थे। ( jainknowledge.com)