Kis kulkar ke time haa maa ki dand vaivsatha thi
जैन ग्रंथों के अनुसार:
- भोगभूमि के समय 14 कुलकर हुए हैं।
- इन कुलकरों ने ही सबसे पहले “दण्ड‑व्यवस्था” (सज़ा की व्यवस्था) बनाई थी।
दण्ड के रूप में केवल शब्दों का प्रयोग होता था:
- पहले 5 कुलकरों ने सिर्फ़ “हा” बोलकर दण्ड देते थे।
- छठे से दसवें कुलकरों ने “हा” और “मा” – ये दो शब्द दण्ड के रूप में रखे।
- आख़िरी 4 कुलकरों ने “हा, मा, धिक्” – तीन शब्दों की दण्ड‑व्यवस्था रखी।
इसलिए आपका प्रश्न – “किस कुलकर के समय ‘हा मा’ की दण्ड व्यवस्था थी?”
का उत्तर: छठे से दसवें कुलकरों के समय ‘हा‑मा’ की दण्ड व्यवस्था थी। इनमें नाम परम्परा अनुसार इस प्रकार बताए जाते हैं (वर्तनी में ग्रन्थानुसार थोड़ा अन्तर मिल सकता है):
- सीमंधर (या सीमंधर)
- विपुलवाहन
- चक्षुष्मान
- यशस्वी (या यशस्वान)
- अभिचन्द्र
यानी यही वे पाँच कुलकर हैं जिनके समय “हा, मा” वाली दण्ड‑व्यवस्था प्रचलित थी।