Bhagwan mahavir ko kalbuka me kisne upsarg diya
भगवान महावीर को "कालबुका" (Kalbuka) नामक उपसर्ग उनके जीवन के दौरान दिया गया था। जैन ग्रंथों के अनुसार, भगवान महावीर को उनके तप और साधना के दौरान 22 प्रकार के उपसर्ग (कष्ट/कठिनाइयाँ) दिए गए थे। "कालबुका" उपसर्ग उनके 14वें उपसर्ग के रूप में प्रसिद्ध है।
कथा के अनुसार: कालबुक नामक एक नाग कन्या थी, जिसका नाम "चंदनबाला" (कुछ स्थानों पर कालबुका) था। वह भगवान महावीर की तपस्या में विघ्न डालने के लिए आई थी। उसने अपने विषैले फन से भगवान के शरीर को घेर लिया और उन्हें कष्ट पहुँचाने का प्रयास किया। लेकिन भगवान महावीर की अचल साधना और क्षमा के प्रभाव से वह शांत हो गई और भगवान के चरणों में गिर पड़ी।
उपसंहार: इस प्रकार, भगवान महावीर को "कालबुका" नामक नाग कन्या ने उपसर्ग दिया था, लेकिन भगवान की सहनशीलता और करुणा के आगे वह परास्त हो गई।
संदर्भ:
- तिलक मंजरी, उपसर्ग वर्णन
- कल्पसूत्र, भगवान महावीर के उपसर्ग प्रसंग
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