Pratham trithnkar aadinath in hindi
प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के बारे में संक्षिप्त जानकारी (हिंदी में):
- नाम और पहचान
- पूर्ण नाम: भगवान ऋषभदेव
- अन्य नाम: आदिनाथ, प्रथम तीर्थंकर, प्रथम जिनेंद्र
- वे हमारे वर्तमान कालचक्र (अवसर्पिणी) के सबसे पहले तीर्थंकर हैं।
- कुल, जन्म स्थान और परिवार
- वंश: इक्ष्वाकु वंश
- जन्म स्थान: अयोध्या (जैन परंपरा में ‘विनीतानगर’)
- पिता: नाभिराजा
- माता: मरूदेवी
- लक्षण (आइकॉन / प्रतीक)
- लांछन (चिह्न): बैल
- वर्ण: स्वर्ण (सोने जैसा) बताया गया है।
- केश: गहरे/काले, जटाधारी रूप के भी उल्लेख मिलते हैं (विशेषकर दीक्षा से पहले के राजरूप में)।
- क्या विशेष था?
- भगवान आदिनाथ को “आदि तीर्थंकर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले
- दीक्षा के बाद 13 माह तक उन्हें आहार नहीं मिला; पहला आहार श्रेयान्स कुमार ने गन्ने के रस (इक्षु-रस) के रूप में अक्षय तृतीया के दिन कराया – इसे ही ‘आदर्श पारणा’ माना जाता है। ( jainknowledge.com)
- मोक्ष
- मोक्ष स्थान: अष्टापद पर्वत (हिमालय क्षेत्र में माना गया एक पावन शिखर) पर भगवान आदिनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया। ( jainknowledge.com)
- परंपरागत भेद (दिगंबर / श्वेतांबर)
- दोनों परंपराएँ उन्हें प्रथम तीर्थंकर के रूप में मानती हैं।
- जन्मस्थल (अयोध्या), माता‑पिता के नाम, लांछन (बैल) आदि में कोई मुख्य मतभेद नहीं है।
- कुछ चरित्र‑विवरण (जैसे जीवन की विस्तृत कथाएँ, राज–त्याग की शैली इत्यादि) में ग्रंथानुसार थोड़ा भेद मिल सकता है, पर मूल तथ्य समान हैं।
यदि आप चाहें तो मैं अगली बार केवल भगवान आदिनाथ के
- जीवन‑चरित्र की विस्तृत कथा,
- या सिर्फ “आदिनाथ भगवान की स्तुति / आरती / पाठ”
आदिनाथ प्रभु पर और प्रश्नों के लिए आप जैन नॉलेज प्लेटफ़ॉर्म पर भी देख सकते हैं