Bhaktambar strota kab padhe
भक्तामर स्तोत्र कब पढ़ें?
- सबसे उत्तम समय
- ब्रह्ममुहूर्त (सुबह सूर्योदय से पहले) - या सुबह स्नान के बाद, शुद्ध वस्त्र पहनकर, शांति से बैठकर।
- अन्य अच्छे समय
- प्रातःकाल – पूजा / स्वाध्याय के समय। - सायंकाल – आरती / प्रतिक्रमण के बाद शांत वातावरण में। - कोई विशेष काम शुरू करने से पहले, यात्रा से पहले, परीक्षा / इंटरव्यू आदि के पहले भी कई लोग पढ़ते हैं।
- कहाँ और कैसे पढ़ें
- घर के पूजा स्थान या जिनालय में। - पहले नवकार मंत्र का जाप, फिर भक्तामर शुरू करना अच्छा माना जाता है। - मन, वचन, शरीर को जितना हो सके शांत और शुद्ध रखकर पढ़ें। - दिन में एक बार पूरा, या समय न हो तो रोज़ कुछ गाथाएँ नियम से।
- नियम (साधारण परिवार के लिए)
- अहिंसा, सत्य, संयम की भावना के साथ पढ़ना। - क्रोध, चिंता, जल्दबाज़ी की स्थिति में हों तो पहले मन को शांत कर लें, फिर पाठ करें।
संक्षेप में: सुबह स्नान के बाद, शुद्ध मन से रोज़ भक्तामर स्तोत्र पढ़ना सबसे उत्तम माना जाता है। जरूरत और श्रद्धा के अनुसार आप सुबह‑शाम दोनों समय भी पढ़ सकते हैं।