45 aagam parichay with sutra
“45 Āgam” बोलने पर सामान्यतः श्वेतांबर परंपरा के 45 आगम समझे जाते हैं। इन्हें 5 समूहों में बाँटते हैं:
- 11 अंग आगम (Ang Āgam) – मुख्य शास्त्र
- 12 उपांग आगम (Upāng Āgam)
- 6 छेदसूत्र (Cheda Sūtra)
- 4 मूलसूत्र (Mūla Sūtra)
- 10 परियुषक / प्रक्रिणक सूत्र (Prakīrṇaka Sūtra)
+ 2 चूलिका–सूत्र: नंदी, अनुस्योगद्वार
नीचे बहुत संक्षिप्त परिचय (parichay) दे रहा हूँ। हर आगम में हज़ारों मूल–सूत्र हैं, इसलिए यहाँ केवल नाम और विषय दे रहा हूँ; पूरा “सूत्र–पाठ” एक उत्तर में देना न तो संभव है, नहीँ सुरक्षित (ग़लत शब्द आ जाएँ तो अनादर हो जाता है)। मूल प्राकृत/संस्कृत सूत्र आप सुरक्षित रूप से ग्रंथों या जैन ज्ञान साइट पर देख सकते हैं।
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1. 11 अंग आगम – मुख्य ग्रंथ
- आचाराङ्ग सूत्र (Ācāranga)
– मुनि–आचार, संयम, अहिंसा, चर्या के विस्तृत नियम।
- सूत्रकृताङ्ग सूत्र (Sūtrakṛtānga)
– अन्य मतों का खण्डन, जैन दर्शन, तप, संयम की महत्ता।
- स्थानाङ्ग सूत्र (Sthānāṅga)
– द्रव्य, भाव आदि तत्त्वों की “संख्या–वार” व्यवस्थित सूची।
- समवायाङ्ग सूत्र (Samavāyāṅga)
– धर्म–पदार्थों की वर्गीकरण, गणना और संयोजन।
- व्याख्याप्रज्ञप्ति / भगवती सूत्र (Bhagavatī)
– भगवान महावीर के प्रश्न–उत्तर रूप में विस्तृत उपदेश; दर्शन, चारित्र, कर्म–सिद्धांत।
- ज्ञाताधर्मकथाङ्ग (Jñātā–dharma–kathāṅga)
– कथाएँ और उदाहरणों द्वारा धर्म–उपदेश।
- उपासकदशाङ्ग (Upāsaka–daśāṅga / Uvāsaga–dasāo)
– श्रावकों के व्रत, आचार, उपासक–धर्म।
- अन्तकृतदशा (Antakṛddaśā)
– वे महापुरुष जो इसी जन्म में संसार का अन्त कर मुक्त हुए।
- अनुत्तरूपपातिकदशा (Anuttaraupapātika–daśā)
– अनुत्तर स्वर्ग में जाने वाले महान आत्माओं के वृत्तान्त।
- प्रश्नव्याकरण / पंहवागरन (Praśna–vyākaraṇa)
– प्रश्न–उत्तर के रूप में धर्म–सम्बंधी समाधान।
- विपाक सूत्र (Vipāka)
– विविध कर्मों के फल–विपाक की कथाएँ।
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2. 12 उपांग आगम (द्वितीयक ग्रंथ)
- औपपातिक सूत्र – जीवों के जीवोंपाद (जन्म) और लोक–वर्णन।
- राजप्रश्नीय / रायपश्निय – राजाओं के प्रश्न, धर्म और शासन–सिद्धांत।
- जीवाभिगम – जीव–अजीव की वैज्ञानिक वर्गीकरण।
- व्यापकपन्यावणा / पन्नवना – दर्शन, प्रमाण, आचार के विभिन्न विषय।
- सूर्यप्रज्ञप्ति – सूर्य आदि के माध्यम से जैन खगोल–भूगोल।
- जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति – जम्बूद्वीप व लोक–रचना का वर्णन।
7–12. अन्य उपांगों में भी जीव–तत्त्व, लोक–तत्त्व और आचार को विस्तार से बताया गया है।
(विस्तृत नाम–सूची के लिए आप नीचे दिए लिंक पर पूरा चार्ट देख सकते हैं।)
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3. 6 छेदसूत्र – मुनि–अनुशासन के ग्रंथ
- आचारदशाः / आयारदसाओ – मुनियों के आचार के दस प्रकरण।
- बृहद् कल्प सूत्र (Bṛhatkalpa) – चार–महाव्रत, संघ–व्यवस्था आदि का विस्तृत नियम–पुस्तक।
- व्यवहार सूत्र – संघ–व्यवहार, निर्णय–प्रक्रिया, दैनंदिन नियम।
- निशीथ सूत्र (Niśītha) – क्या–क्या त्याज्य (निषिद्ध) है – उसका विस्तार।
- जीवकल्प (Jīva–kalpa) – विशेष अवसरों पर आचरण–विनियमन।
- महानिशीथ (Mahāniśītha) – और भी सूक्ष्म निषेध व आदेश।
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4. 4 मूलसूत्र – नवीन मुनियों के लिए आधार ग्रंथ
- आवश्यक सूत्र (Āvaśyaka) – नित्य करने योग्य 6 आवश्यक कार्य, प्रतिक्रमण आदि।
- दशवैकालिक सूत्र (Daśavaikālika) – संक्षेप में मुनि–आचार, दस मुख्य विषय।
- उत्तराध्ययन सूत्र (Uttarādhyayana) – 36 अध्यायों में सम्पूर्ण साधना–मार्ग।
- ओघनिर्युक्ति / पिण्डनिर्युक्ति – मूल सूत्रों की स्मरण–रचना (mnemonic), टीका–स्वरूप।
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5. 10 प्रक्रिणक (प्रकीर्णक) सूत्र – विविध विषय
- चतु:शरण सूत्र – अरिहंत, सिद्ध, साधु, धर्म – इन चार में शरण।
- आतुरप्रत्याख्यान – रोगी की तप–साधना और मृत्यु–पूर्व त्याग।
- भट्ट–परिज्ञा – उपवास, संथारा आदि की विवेचना।
- सांस्थारक / सांथारक – संथारा–सल्याखना से सम्बन्धित नियम।
- तण्डुलवैचारिक – शरीर, गर्भ आदि पर विचार।
- चन्द्रवेध्यक – ध्यान और मानसिक साधना के कुछ सूत्र।
- देवेंद्रस्तोत्र – देवों की स्तुति के माध्यम से धर्म–उपदेश।
- गणिविद्या – आचार्य/गणी की विशेष विद्या और उत्तरदायित्व।
- महाप्रत्याख्यान – महान–त्याग, महान–प्रत्याख्यान की प्रक्रिया।
- वीरस्तव – तीर्थंकर वीर प्रभु (महावीर) की स्तुति।
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परंपरागत भेद (Digambar – Śvetāmbara)
- श्वेतांबर परंपरा ऊपर बताए गए इन 45 आगमों को परंपरागत “आगम–समूह” मानती है।
- दिगंबर परंपरा मानती है कि मूल आगम (14 पूर्वों सहित) बहुत पहले लुप्त हो चुके, इसलिए वर्तमान श्वेतांबर आगमों को वे “मूल आगम” नहीं मानते; उनके लिए दूसरे ग्रंथ (जैसे कसाय–पाहुड, षट्खण्डागम आदि) प्रधान हैं।
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“सूत्र के साथ” कैसे पढ़ें?
हर आगम के:
- मूल प्राकृत/संस्कृत सूत्र,
- उसके सरल अर्थ (अनुवाद),
- और टीका – अलग–अलग बड़े ग्रंथ हैं।
एक उत्तर में सब 45 आगमों के मूल–सूत्र देना न तो सम्भव है और न ही सम्मानजनक (गलतियाँ होने की आशंका रहती है)। अच्छा तरीका यह है:
- पहले नाम और विषय से परिचय (जैसे ऊपर)।
- फिर किसी एक–एक आगम (जैसे आचाराङ्ग, उत्तराध्ययन, दशवैकालिक) को लेकर
- मूल प्राकृत सूत्र - और उसका अर्थ – अलग–अलग पढ़ना।
आप 45 आगम की simple सूची और परिचय यहाँ भी देख सकते हैं
और अगर आपको किसी एक खास आगम (जैसे केवल “आचाराङ्ग सूत्र” या “उत्तराध्ययन सूत्र”) के चुने हुए प्रसिद्ध सूत्रों के अर्थ चाहिए हों, तो उसके लिए अलग से विस्तार से पढ़ना सबसे शुद्ध और सुरक्षित तरीका है।