jain 79 pathparmpara
“79 पाट‑परम्परा” या “79 पट्ट‑परम्परा” से आम तौर पर यह अर्थ लिया जाता है कि किसी विशेष जैन परम्परा / गच्छ / संघ में, भगवान महावीर से लेकर आज के वर्तमान आचार्य तक कुल 79 आचार्य (पट्टधर) माने जा रहे हैं।
थोड़ा सरल शब्दों में:
- “पाट / पट्ट” = आचार्य‑पीठ, गुरु की गद्दी
- “परम्परा” = एक के बाद एक आने वाले आचार्यों की शृंखला
- तो “79 पाट‑परम्परा” = वह परम्परा जिसमें
ध्यान रखने योग्य बातें:
- हर गच्छ / परम्परा की अपनी अलग पट्ट‑परम्परा होती है
- जैसे कहीं 73वें पट्टधर, कहीं 77वें, कहीं 82वें आदि सुनने को मिलता है। - यह फर्क इस पर निर्भर है कि किस‑किस आचार्य को अपनी परम्परा में गिना जा रहा है।
- “79 पाट‑परम्परा” कोई एक सार्वभौमिक जैन सूची नहीं है,
बल्कि किसी खास गच्छ या परम्परा (जैसे किसी विशेष श्वेताम्बर गच्छ, खرتरगच्छ, तेरापंथ, साधुमार्गी आदि या किसी दिगम्बर मुनि‑परम्परा) की अंदरूनी गिनती हो सकती है।
- यदि आप किसी विशेष नाम (जैसे –
“खरतरगच्छ 79 पाट‑परम्परा”, या “फलाँ आचार्य की 79 पाट‑परम्परा”) के बारे में पूछ रहे हैं, तो उसकी पूरी 79 नामों की सूची आपको - अपने ही गच्छ के धर्म‑ग्रन्थ, - समुदाय द्वारा प्रकाशित “पट्टावली / परम्परा‑पुस्तक”, - या सीधे अपने गुरु‑महाराज / प्रवचनकार से लेना सबसे शुद्ध और सही रहेगा।
अभी आपके प्रश्न से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि आप
- 79 आचार्यों की पूरी नामावली चाहते हैं, या
- केवल “79 पाट‑परम्परा” का अर्थ / समझ
ऊपर मैंने इसका अर्थ और सिद्धान्त समझा दिया है। यदि आप किसी खास गच्छ / परम्परा का नाम बताएँ तो उसी आधार पर संक्षेप में जानकारी दी जा सकती है, परन्तु पूरी सही नामावली के लिए हमेशा अपने परम्परा‑ग्रन्थ और गुरु की शरण ही प्रमाण मानी जाती है।