Saatva anuvrat ka path
सात (7) अणुव्रत (अनुव्रत) जैन धर्म के श्रावकों (गृहस्थों) के लिए निर्धारित मुख्य व्रत हैं। इनका पालन गृहस्थ जीवन में अहिंसा, सत्य, और संयम की ओर अग्रसर करता है। सात अणुव्रतों के नाम एवं संक्षिप्त प्रतिज्ञा (पाठ) निम्नलिखित हैं:
1. अहिंसा अणुव्रत मैं जान-बूझकर प्राणियों को न मारूँगा, न मरवाऊँगा, न मारने का अनुमोदन करूँगा।
2. सत्य अणुव्रत मैं झूठ नहीं बोलूँगा, न बोलवाऊँगा, न बोलने का अनुमोदन करूँगा।
3. अस्तेय अणुव्रत मैं बिना दिए हुए किसी की वस्तु नहीं लूँगा, न दिलवाऊँगा, न लेने का अनुमोदन करूँगा।
4. ब्रह्मचर्य अणुव्रत मैं केवल अपनी पत्नी/पति के साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन करूँगा, अन्य किसी के साथ कदापि सम्बंध नहीं करूँगा।
5. अपरिग्रह अणुव्रत मैं अपनी आवश्यकतानुसार ही धन, संपत्ति आदि का संग्रह करूँगा, अधिक संग्रह नहीं करूँगा।
6. देशावकाशिक (देशावकाशिक) अणुव्रत मैं अपनी दिनचर्या को एक निश्चित क्षेत्र (सीमा) में ही रखूँगा, अनावश्यक दूर नहीं जाऊँगा।
7. अनर्थदंड अणुव्रत मैं अनावश्यक पापरूप कार्यों (जैसे — व्यर्थ गपशप, दुर्वचन, हिंसक विचार आदि) से बचूँगा।
संक्षिप्त सामूहिक पाठ: "मैं (अपना नाम) सात अणुव्रतों का श्रद्धापूर्वक पालन करूंगा — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, देशावकाशिक और अनर्थदंड अणुव्रत। इन व्रतों का पालन करते हुए जैन धर्म के मार्ग पर अग्रसर रहूंगा।"
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