Pratikraman sutra ka saatva anuvrat (upbhogparibhogvihi) ka path
प्रतिक्रमण सूत्र में सातवां अनुव्रत (उपभोग-परिभोग-विरति) इस प्रकार है:
"इहं इमं उपभोगपरिभोगविरमणव्रतं पाणियत्तं समादियामि।"
इसका अर्थ है: "मैं उपभोग (एक बार के प्रयोग की वस्तुएँ) और परिभोग (बार-बार उपयोग की वस्तुएँ) में संयम का व्रत धारण करता/करती हूँ।"
यह अनुव्रत श्रावक-श्राविकाओं के लिए है, जिससे वे भोग-विलास, अत्यधिक उपयोग या उपभोग से बचें, और केवल आवश्यक वस्तुओं का ही सीमित प्रयोग करें।