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    Ghar opening vidhi

    6 months ago 108

    Jain ghar opening (गृह प्रवेश) बहुत सरल, अहिंसक और शुद्ध भाव से होता है। यहाँ एक सरल जैन विधि बता रहा हूँ, जिसे कोई भी श्वेताम्बर / दिगम्बर परिवार सहज रूप से कर सकता है (बिना वैदिक हवन, ग्रह‑शांति आदि के):

    ---

    1. पहले से तैयारी

    • घर अच्छे से साफ करें, जाले‑धूल न रहें।
    • अगर सम्भव हो तो उस दिन:
    - सूर्मि / लहसुन / कन्द‑मूल आदि न लें - शक्य हो तो अष्टमी / चतुर्दशी / पर्वदिन चुनें, पर यह अनिवार्य नहीं – भाव मुख्य है।
    • एक छोटा पूजा‑स्थान तय करें जहाँ आगे चलकर गृह‑मन्दिर रहेगा।

    सामग्री (सरल रखिए):

    • अक्षत (साफ़ चावल)
    • थोड़ा कुमकुम / चन्दन
    • फूल
    • अगरबत्ती / दीपक
    • जैन चित्र / मूर्ति (तीर्थंकर प्रतिमा या पंच परमेष्ठी चित्र)
    • फल / सूखे मेवे (निरामिष, जैन नियम के अनुसार)

    ---

    2. घर में प्रवेश कैसे करें

    1. दरवाज़े पर खड़े होकर सभी मिलकर 3–5 बार णमोकार मंत्र बोलें:

    ```text णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं ॥ एसो पंचणमोयरो, सव्वपावप्पणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पडमं हवई मंगलं॥ ```

    1. गृहस्वामी‑गृहस्वामिनी (और बच्चे हों तो साथ में)

    - दाहिना पैर रखकर अंदर प्रवेश करें - मन में यही भाव रखें – “यह घर आत्म‑शुद्धि, स्वाध्याय और साधना के लिए उपयोग होगा, किसी हिंसा, मिथ्याचार के लिए नहीं।”

    ---

    3. गृह‑मन्दिर / पूजा‑स्थान की स्थापना

    1. चुने हुए स्थान पर एक साफ़ आसन बिछाएँ।
    2. वहाँ पर तीर्थंकर की प्रतिमा / चित्र या पंच‑परमेष्ठी चित्र स्थापित करें।
    3. प्रतिमा / चित्र पर:

    - चन्दन / केसर का तिलक - अक्षत - फूल चढ़ाएँ।

    ---

    4. घर खोलने की सरल पूजा‑विधि

    क्रम बहुत बड़ा न रखें, कम भी करेंगे तो चलेगा, बस भाव शुद्ध हो:

    1. मंगलाचरण / स्तुति

    - 3–5 बार णमोकार मंत्र - चाहें तो छोटा स्तवन: - “भाव भीनी वंदना भगवान चरणों में चढ़ाएँ…” जैसा कोई भी जैन स्तवन, या - “जय जय जिनेन्द्र…”, “हे भगवान जिनेन्द्र…” आदि।

    1. पंच परमेष्ठी का स्मरण

    - मन में या बोलकर: - अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु‑साध्वी भगवंतों को नमस्कार‑भाव।

    1. स्वाध्याय / पाठ (थोड़ा सा भी चलेगा)

    - नवकारसी / भक्तामर का 1–2 श्लोक, - या “जिनवाणी माँ” की महिमा का छोटा पाठ, - या कोई भी छोटा जैन पाठ जो घर वाले रोज पढ़ते हों।

    1. शांति‑भावना / मंगल‑पाठ

    जैसे सरल भाव से कहें: - “इस घर में किसी भी प्रकार की हिंसा, झूठ, लोभ, क्रोध न हो। यह घर सम्यक दर्शन‑ज्ञान‑चारित्र को बढ़ाने वाला बने। सब जीवों के प्रति मैत्री, करुणा और क्षमा का भाव रहे।”

    1. आरती (यदि परम्परा में हो)

    - जैन आरती (जैसे: “आरती उतारूं तेरी, जिनराज मेरे…”) कर सकते हैं। - दीपक घुमाकर आरती करें, फिर सब मिलकर नमस्कार करें।

    1. फल / मिठाई का वितरण

    - पहले भगवान के समक्ष रखें, नैवेद्य रूप से। - फिर सबको बाँटें। ध्यान: पूरी तरह जैन नियम के अनुसार बनी हो (कोई अण्डा, मांसाहार, कन्द‑मूल, आदि न हो)।

    ---

    5. किन बातों से बचें (जैन दृष्टि से)

    • किसी भी प्रकार का हवन, पशु‑बलि, अंडा, मदिरा, आदि बिल्कुल न हो।
    • वास्तु‑पुरुष, ग्रह‑देवता आदि के नाम पर की जाने वाली वैदिक, तांत्रिक क्रियाएँ जैन सिद्धांत के अनुसार आवश्यक नहीं हैं।
    • ज़्यादा दिखावा, शोर‑शराबा, नाच‑गाना – यह सब कम से कम रखें; वातावरण शांत, सौम्य, साधना‑अनुकूल हो।

    ---

    6. आगे के लिए संकल्प

    अंत में सब मिलकर संकल्प लें:

    • रोज़ कम से कम कुछ समय प्रार्थना, ध्यान या स्वाध्याय घर में अवश्य होगा।
    • घर में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह के मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे।
    • अपने घर को सम्यक मार्ग की प्रेरणा का केन्द्र बनाएँगे।

    ---

    यदि आप जैन घर से जुड़ी और बातें (जैसे – घर में क्या‑क्या रखना उचित है, उपहार क्या दें, आदि) पढ़ना चाहें तो आप और जानकारी यहाँ देख सकते हैं

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