Ghar opening vidhi
Jain ghar opening (गृह प्रवेश) बहुत सरल, अहिंसक और शुद्ध भाव से होता है। यहाँ एक सरल जैन विधि बता रहा हूँ, जिसे कोई भी श्वेताम्बर / दिगम्बर परिवार सहज रूप से कर सकता है (बिना वैदिक हवन, ग्रह‑शांति आदि के):
---
1. पहले से तैयारी
- घर अच्छे से साफ करें, जाले‑धूल न रहें।
- अगर सम्भव हो तो उस दिन:
- एक छोटा पूजा‑स्थान तय करें जहाँ आगे चलकर गृह‑मन्दिर रहेगा।
सामग्री (सरल रखिए):
- अक्षत (साफ़ चावल)
- थोड़ा कुमकुम / चन्दन
- फूल
- अगरबत्ती / दीपक
- जैन चित्र / मूर्ति (तीर्थंकर प्रतिमा या पंच परमेष्ठी चित्र)
- फल / सूखे मेवे (निरामिष, जैन नियम के अनुसार)
---
2. घर में प्रवेश कैसे करें
- दरवाज़े पर खड़े होकर सभी मिलकर 3–5 बार णमोकार मंत्र बोलें:
```text णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं ॥ एसो पंचणमोयरो, सव्वपावप्पणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पडमं हवई मंगलं॥ ```
- गृहस्वामी‑गृहस्वामिनी (और बच्चे हों तो साथ में)
- दाहिना पैर रखकर अंदर प्रवेश करें - मन में यही भाव रखें – “यह घर आत्म‑शुद्धि, स्वाध्याय और साधना के लिए उपयोग होगा, किसी हिंसा, मिथ्याचार के लिए नहीं।”
---
3. गृह‑मन्दिर / पूजा‑स्थान की स्थापना
- चुने हुए स्थान पर एक साफ़ आसन बिछाएँ।
- वहाँ पर तीर्थंकर की प्रतिमा / चित्र या पंच‑परमेष्ठी चित्र स्थापित करें।
- प्रतिमा / चित्र पर:
- चन्दन / केसर का तिलक - अक्षत - फूल चढ़ाएँ।
---
4. घर खोलने की सरल पूजा‑विधि
क्रम बहुत बड़ा न रखें, कम भी करेंगे तो चलेगा, बस भाव शुद्ध हो:
- मंगलाचरण / स्तुति
- 3–5 बार णमोकार मंत्र - चाहें तो छोटा स्तवन: - “भाव भीनी वंदना भगवान चरणों में चढ़ाएँ…” जैसा कोई भी जैन स्तवन, या - “जय जय जिनेन्द्र…”, “हे भगवान जिनेन्द्र…” आदि।
- पंच परमेष्ठी का स्मरण
- मन में या बोलकर: - अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु‑साध्वी भगवंतों को नमस्कार‑भाव।
- स्वाध्याय / पाठ (थोड़ा सा भी चलेगा)
- नवकारसी / भक्तामर का 1–2 श्लोक, - या “जिनवाणी माँ” की महिमा का छोटा पाठ, - या कोई भी छोटा जैन पाठ जो घर वाले रोज पढ़ते हों।
- शांति‑भावना / मंगल‑पाठ
जैसे सरल भाव से कहें: - “इस घर में किसी भी प्रकार की हिंसा, झूठ, लोभ, क्रोध न हो। यह घर सम्यक दर्शन‑ज्ञान‑चारित्र को बढ़ाने वाला बने। सब जीवों के प्रति मैत्री, करुणा और क्षमा का भाव रहे।”
- आरती (यदि परम्परा में हो)
- जैन आरती (जैसे: “आरती उतारूं तेरी, जिनराज मेरे…”) कर सकते हैं। - दीपक घुमाकर आरती करें, फिर सब मिलकर नमस्कार करें।
- फल / मिठाई का वितरण
- पहले भगवान के समक्ष रखें, नैवेद्य रूप से। - फिर सबको बाँटें। ध्यान: पूरी तरह जैन नियम के अनुसार बनी हो (कोई अण्डा, मांसाहार, कन्द‑मूल, आदि न हो)।
---
5. किन बातों से बचें (जैन दृष्टि से)
- किसी भी प्रकार का हवन, पशु‑बलि, अंडा, मदिरा, आदि बिल्कुल न हो।
- वास्तु‑पुरुष, ग्रह‑देवता आदि के नाम पर की जाने वाली वैदिक, तांत्रिक क्रियाएँ जैन सिद्धांत के अनुसार आवश्यक नहीं हैं।
- ज़्यादा दिखावा, शोर‑शराबा, नाच‑गाना – यह सब कम से कम रखें; वातावरण शांत, सौम्य, साधना‑अनुकूल हो।
---
6. आगे के लिए संकल्प
अंत में सब मिलकर संकल्प लें:
- रोज़ कम से कम कुछ समय प्रार्थना, ध्यान या स्वाध्याय घर में अवश्य होगा।
- घर में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह के मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे।
- अपने घर को सम्यक मार्ग की प्रेरणा का केन्द्र बनाएँगे।
---
यदि आप जैन घर से जुड़ी और बातें (जैसे – घर में क्या‑क्या रखना उचित है, उपहार क्या दें, आदि) पढ़ना चाहें तो आप और जानकारी यहाँ देख सकते हैं