वर्धमान आंबील तप में कौन कौन सी माला करना चाहिए और कौन सा जाप करना चाहिए
वर्धमान आंबील‑तप के बारे में दो बातें अलग रखना ज़रूरी हैं: 1) शास्त्र में वर्णित “आंबिल वर्धमान तप” 2) आजकल चलने वाली लोक‑प्रथा जैसे – कितनी माला, कौन‑सा जाप इत्यादि
शास्त्रों में इस तप का मूल ज़ोर “उपवास/आहार‑नियम की वृद्धि” पर है, मालाओं की गिनती पर नहीं। मालाएँ और जाप की संख्या ज़्यादातर स्थानीय परंपरा से तय होती हैं, एक सार्वभौमिक “फिक्स नियम” श्वेतांबर‑दिगंबर किसी में भी नहीं है।
इसलिए उत्तर दो भाग में समझिए:
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1. वर्धमान आंबील‑तप में शास्त्रीय पक्ष
- “आंबिल वर्धमान तप” का अर्थ है –
- मुख्य साधना:
कहीं भी यह नहीं कहा गया कि “फलाँ तप में रोज़ इतनी ही माला ज़रूरी है, तभी तप पूरा माना जाएगा।”
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2. आजकल प्रचलित जाप / माला (लोक‑नियम)
अधिकांश स्थानों पर गृहस्थ लोग ऐसे करते हैं (ये लोक‑प्रचलित हैं, शास्त्रगत अनिवार्य नियम नहीं):
(क) कौन‑सा जाप करना चाहिए?
सुरक्षित, सब पर लागू और सबसे उत्तम जाप:
- णमोकार / नवकार मंत्र
- पूरे तप के दौरान मुख्य जाप यही रखना श्रेष्ठ माना जाता है। - सुबह‑शाम, आंबिल ग्रहण से पहले‑बाद में, चलते‑फिरते भी जपा जा सकता है।
- साथ‑साथ इच्छा हो तो:
- “ऊँ ह्रीं णमो अरिहंताणं” (अरिहंत नमस्कार बीज मंत्र) - या - ऊवासग्गहरं स्तोत्र (उवसग्गहरं पर्हू… ) - या - अपने कुल‑देव, कुल‑देवी अथवा आराध्य तीर्थंकर का कोई छोटा स्तोत्र / मंत्र
परंतु मूल आधार फिर भी नवकार मंत्र ही रखें।
(ख) कितनी माला करनी चाहिए?
यह पूरी तरह आपकी क्षमता और आपके गुरु/आचार्य/पंडित/परिवार‑परंपरा के नियम पर निर्भर है। आमतौर पर लोग जैसे नियम लेते हैं, उदाहरण के रूप में:
- रोज़ कम से कम:
कई जगह “वर्धमान” भाव से माला भी बढ़ाते हैं, जैसे:
- 1वें दिन – 11 माला
- 2वें दिन – 21 माला
- 3वें दिन – 31 माला
- …इत्यादि
लेकिन यह स्थानीय / पारिवारिक नियम होता है, शास्त्र में ऐसा कोई बाध्यकारी विधान नहीं कि “वर्धमान आंबील तप = रोज़ इतनी ही माला।”
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3. आपको practically क्या करना चाहिए?
- सबसे पहले –
अपने घर के गुरु‑भगवन्त, साधु‑साध्वीजी, प्रवचनकार या जिस मंदिर/संघ में आप यह तप कर रहे हैं, उनसे पूछिए – “हमारे यहाँ वर्धमान आंबील‑तप का क्या‑क्या नियम रखवाते हैं? कितनी माला / कौन‑सा जाप?” वही नियम आपका मुख्य मानक होना चाहिए, क्योंकि तप वहीँ पूर्ण माना जाएगा जहाँ आप कर रहे हैं।
- अगर कोई विशेष लोक‑नियम न हो, तो आप यह “साधारण लेकिन श्रेष्ठ” नियम ले सकते हैं:
- रोज़: - कम से कम 21 माला नवकार मंत्र की, - और यदि संभव हो तो – - 1–3 बार समायिक - थोड़ा‑सा स्वाध्याय (जैसे नवकार का अर्थ, तत्त्वज्ञान की छोटी पुस्तक आदि) - अतिरिक्त समय में: - मन ही मन या माला से “णमोकार मंत्र” का निरन्तर जाप।
- ध्यान रखें:
- तप का मुख्य फल भोजन की कड़ाई + मन की शुद्धि + अहिंसा और संयम से आता है, केवल माला की गिनती से नहीं। - इसलिए जो माला आप निश्चय करें, उसे ईमानदारी और शुद्ध भाव से पूरा करना सबसे ज़रूरी है।
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संक्षेप:
- वर्धमान आंबील‑तप के लिए शास्त्र में कोई “फिक्स माला संख्या” नहीं है।
- सबसे उत्तम और सुरक्षित जाप – णमोकार (नवकार) मंत्र है।
- माला की संख्या – 11/21/51 या आपकी क्षमता के अनुसार, और स्थानीय गुरु/परंपरा के अनुसार रखें।
- शंका हो तो जहाँ आप तप कर रहे हैं, वहाँ के गुरु‑भगवन्त / पंडितजी से नियम पक्का कर के ही प्रारंभ करें, वही सबसे उचित रहेगा।