Ek bhavadhari jeevo ke naam
जैन धर्म के अनुसार "एकभावधारी जीव" (Ek Bhavadhari Jeev) वे जीव होते हैं, जो एक ही प्रकार का भाव या गतिक्रम रखते हैं। आमतौर पर, यह शब्द सांसारिक जीवों की विभिन्न श्रेणियों में से एक श्रेणी को दर्शाता है।
जैन आगमों के अनुसार, जीवों को उनके इन्द्रियों की संख्या और भावों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। "एकभावधारी" जीव वे होते हैं, जिनमें केवल एक ही प्रकार का भाव या प्रवृत्ति होती है।
उदाहरण: एक इन्द्रिय जीव (Ekendriya Jeev) - जैसे पृथ्वी काय जीव, जल काय जीव, अग्नि काय जीव, वायु काय जीव, वनस्पति काय जीव। इनमें से प्रत्येक एक ही प्रकार का भाव (सेंस/इन्द्रिय) रखते हैं, अतः ये "एकभावधारी" कहलाते हैं।
कुछ एकभावधारी जीवों के नाम:
- पृथ्वी काय जीव (Earth-bodied beings) - जैसे पत्थर, मिट्टी, रेत।
- जल काय जीव (Water-bodied beings) - जैसे पानी की बूँदें।
- अग्नि काय जीव (Fire-bodied beings) - जैसे अग्नि की चिंगारी।
- वायु काय जीव (Air-bodied beings) - जैसे हवा के कण।
- वनस्पति काय जीव (Plant-bodied beings) - जैसे पेड़-पौधे, घास।
ये सभी जीव एक ही प्रकार के भाव (इन्द्रिय) से युक्त होते हैं, अतः इन्हें "एकभावधारी जीव" कहा जाता है।