राजा श्रेणिकके पूर्वभव
राजा श्रेणिक के “पूर्व‑भव” के बारे में हमारी प्रचलित जैन आगम‑परंपरा में उतनी विस्तृत जन्म‑माला (जैसी भगवान महावीर के लिए मिलती है) उपलब्ध नहीं है।
जैन ग्रंथों में मुख्य रूप से दो बातें स्पष्ट मिलती हैं:
- यह वर्तमान जन्म
- वे मगध के राजा बिम्बिसार ही हैं, जिन्हें जैन परंपरा में राजा श्रेणिक कहा गया है। - भगवान महावीर के प्रमुख श्रावक, अत्यन्त श्रद्धालु, परन्तु साथ‑साथ घोर क्रोध, आसक्ति आदि वाले उच्च कर्म‑बंधनयुक्त जीव के रूप में वर्णित हैं।
- उनका भावी जन्म (भविष्य)
- जैन परंपरा (विशेषकर श्वेताम्बर परंपरा) में वर्णन है कि राजा श्रेणिक भविष्य में अगले अवसर्पिणी काल में प्रथम तीर्थंकर “महापद्म” के रूप में जन्म लेंगे। - यानी – उनका भावी भव स्पष्ट रूप से तीर्थंकरत्व से जुड़ा बताया गया है।
जहाँ तक सवाल है – तुरन्त पिछले जन्म में वे कौन थे, या बहुत‑से पूर्वजन्मों की क्रमवार सूची क्या थी, तो
- प्रामाणिक आगमों में यह विस्तार से, सर्वमान्य रूप से, नहीं बताया गया।
- कुछ लोककथाएँ / क्षेत्रीय कथाएँ ज़रूर मिलती हैं, पर वे सब परंपरागत और एक‑सी नहीं हैं, इसलिए उन्हें पक्के “आगमिक” तथ्य की तरह नहीं कहा जा सकता।
इसलिए संक्षेप में:
- आम तौर पर जैन धर्म‑ग्रंथों का ज़ोर उनके आज के जीवन (राजा श्रेणिक के रूप में) और भावी तीर्थंकर भव (महापद्म) पर है,
- न कि उनके पूर्वजन्मों की लम्बी सूची पर।