Mahavideh kshetra ka varnan kijiye
महावीदह क्षेत्र का वर्णन (सरल हिंदी में)
महावीदह क्षेत्र जैन ब्रह्माण्ड-विज्ञान (लोक-विज्ञान) में बहुत ही पवित्र और विशेष स्थान माना जाता है। इसे ऐसा क्षेत्र कहा गया है जहाँ आज भी प्रभु के प्रत्यक्ष देशना (उपदेश) चलते हैं।
1. महावीदह क्षेत्र कहाँ माना जाता है?
- जैन ग्रन्थों में बताया गया है कि यह जम्बूद्वीप के मध्य भाग में स्थित एक विशेष क्षेत्र है।
- यह भी कर्मभूमि ही है, जैसे हमारा भरत क्षेत्र, लेकिन यह हमसे भिन्न और अधिक पुण्यवान माना जाता है।
2. समय की विशेषता
हमारे भरत क्षेत्र में समय चक्र (उत्सर्पिणी–अवसर्पिणी) के कारण सुख–दुःख, धर्म–अधर्म में बहुत उतार–चढ़ाव आता है। लेकिन महावीदह क्षेत्र की विशेषता यह है कि:
- वहाँ का समय सदैव धर्म के लिए अनुकूल रहता है।
- वहाँ पर तप, त्याग, संयम आसानी से पनपते हैं।
- अधर्म, अत्याचार आदि की तीव्रता वैसी नहीं होती जैसी हमारे भरत क्षेत्र में देखी जाती है।
3. तीर्थंकरों की देशना का स्थान
जैन परम्परा के अनुसार:
- वर्तमान काल में हमारे भरत क्षेत्र में कोई प्रत्यक्ष जीवित तीर्थंकर नहीं हैं।
- महावीदह क्षेत्र ऐसा दिव्य स्थान है जहाँ सदैव कम से कम कुछ तीर्थंकरों की देशना चलती रहती है।
- वहाँ आज भी जिनेन्द्र भगवान की समवसरण में अनन्त जीवराशि धर्म सुन रही है, संयम धारण कर रही है और मोक्षमार्ग पर अग्रसर है।
इसी कारण अनेक श्रावक–श्राविकाएँ, साधु–साध्वी भविष्य में महावीदह क्षेत्र में जन्म लेने की कामना करके पुण्य कर्म करते हैं, ताकि वहाँ प्रत्यक्ष भगवान के चरणों में धर्म सुनने का अवसर मिल सके।
4. वहाँ के जीवों का जीवन
महावीदह क्षेत्र के बारे में संक्षेप में यह बातें बताई जाती हैं:
- वहाँ के मनुष्यों का शरीर, आयु, बल आदि हमारे भरत क्षेत्र से सामान्यतः अधिक होते हैं।
- धर्म सुनना, सम्यक्दर्शन पाना और संयम (दीक्षा) लेना अपेक्षाकृत सरल होता है, क्योंकि वातावरण धर्मप्रधान है।
- वहाँ के लोग अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह इत्यादि नियमों के प्रति अधिक सजग रहते हैं।
5. मोक्ष से सम्बन्ध
- महावीदह क्षेत्र मोक्षमार्ग के अभ्यास के लिए अत्यन्त अनुकूल माना गया है।
- वहाँ अनेक जीव सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्चरित्र द्वारा इस ही काल में मोक्ष प्राप्त करते रहते हैं।
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संक्षेप में:
महावीदह क्षेत्र वही दिव्य भूमि है जहाँ अभी भी जिनेन्द्र भगवान प्रत्यक्ष देशना दे रहे हैं और असंख्य जीव उनके समवसरण में बैठकर धर्म सुन रहे हैं। हमारा भरत क्षेत्र तो अभी भगवान-विहीन (तीर्थंकर-विहीन) अवस्था में है, लेकिन महावीदह क्षेत्र धर्म, ज्ञान और मोक्ष-मार्ग से सदा सम्पन्न क्षेत्र है।