Jain Knowledge
Menu
  • JainGPT
  • Jain Directory
    • Jain Tirthsthaans
    • Jain Sangeetkars
    • Jain Pandits
    • Jain Acharya
    • Jain Businessman
  • Jain Media
    • Jain Stavan
    • Jain Pachkhan
    • Jain Stories
    • Jain Sutras
    • Jain Facts / Concepts
  • Advertise with us
Jain Knowledge
login Register

Get In Touch

phone
info@jainknowledge.com

online support

phone
Mumbai

India

  • Home
  • Jain Questions
  • Ardhmagdhi aagam sahitya ka parichay or 12 upang ka itihas
  • author Posted by
    Jain Follower

    Ardhmagdhi aagam sahitya ka parichay or 12 upang ka itihas

    6 months ago 110

    नीचे संक्षिप्त व सरल रूप में उत्तर दिया जा रहा है –

    ---

    1. अर्धमागधी आगम साहित्य का परिचय

    (1) अर्धमागधी क्या है?

    • अर्धमागधी (अर्धमागधि) एक प्राचीन प्राकृत भाषा है।
    • भगवान महावीर स्वामी ने उपदेश प्राकृत/अर्धमागधी भाषा में दिया, ताकि सामान्य जन भी समझ सकें।
    • संघ में गणधर एवं आचार्यों ने इन्हीं उपदेशों को अर्धमागधी में आगम रूप में व्यवस्थित किया।

    (2) आगम क्या हैं?

    • “आगम” = “आगत” अर्थात् जो भगवान के ज्ञान से आया हो।
    • विशेष रूप से श्वेताम्बर परम्परा में भगवान महावीर के उपदेशों का संकलन ४५ आगम के रूप में माना जाता है (११ अंग + १२ उपांग + चेदसूत्र + मूलसूत्र आदि)।
    • ये आगम प्रायः अर्धमागधी/प्राकृत भाषा में रचे गये हैं, बाद में इन पर संस्कृत और देशी भाषाओं में टीकाएँ लिखी गईं।

    (3) अर्धमागधी आगम साहित्य की विशेषताएँ

    • सरल, बोल-चाल की भाषा, जिससे साधारण श्रावक भी सिद्धान्त समझ सके।
    • विषय –
    - तत्त्वज्ञान (जीव, अजीव, कर्म, बन्ध, निर्वाण आदि) - आचार (साधु-श्रावक का आचरण, व्रत, नियम) - इतिहास-कथाएँ (पूर्व जन्म कथाएँ, राजाओं की कथाएँ) - ध्यान, प्रतिक्रमण, अलोचना आदि।
    • समय के साथ स्मृति-परम्परा, परिषदें, मठों की परम्परा के कारण कुछ आगम संरक्षित रहे, कुछ को लुप्त (खोये हुए) माना जाता है, विशेषकर दिगम्बर परम्परा में।

    ---

    2. १२ उपांग (Upāṅga) आगम – नाम और संक्षिप्त परिचय

    श्वेताम्बर परम्परा के अनुसार १२ उपांग आगम इस प्रकार हैं (ये मूलतः अर्धमागधी/प्राकृत में हैं):

    1. उववाइ (उववाइय / उपासकदशांग)

    - आदर्श श्रावकों की दस कथाएँ, उनके व्रत, त्याग और धर्मानुष्ठान का वर्णन।

    1. रायपस्सइ (राजप्रश्नीय)

    - राजाओं के प्रश्न और उनके उत्तर के माध्यम से धर्म, राजनीति, नीति, कर्म, लोक-परलोक की चर्चा।

    1. जीवाभिगम्म (जीवाभिगम)

    - जीवों के भेद, जन्म-स्थान, गति–अगति, संवेदन-इन्द्रिय आदि का विस्तार से वर्णन।

    1. पण्णवणास (प्रज्ञापन / पन्नवणा)

    - लोक, अलोक, नरक, देव, तिर्यंच संसार का विस्तृत वर्णन; भूगोल व कॉस्मोलॉजी से जुड़ी सामग्री।

    1. सूरपण्णत्ति (सूर्यप्रज्ञप्ति)

    - सूर्य के उदय-अस्त, दिशा, काल-गणना आदि से सम्बन्धित वर्णन।

    1. जंभूद्वीपपण्णत्ति (जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति)

    - जम्बूद्वीप का वर्णन, पर्वत, समुद्र, क्षेत्र, वर्णाश्रम आदि की रचना – जैन कॉस्मोग्राफ़ी का महत्वपूर्ण ग्रन्थ।

    1. चूल्लक्खम्म (लघु-कर्मप्राभृत / चूल्ल-कर्मप्राभृति)

    - कर्म सिद्धान्त का संक्षिप्त विवरण, कर्मों के प्रकार, बन्ध–उदय आदि।

    1. महाक्खम्म (महाकर्मप्राभृत)

    - कर्म सिद्धान्त का विस्तृत वर्णन, अनेक दृष्टांतों के साथ।

    1. पुत्तपत्त (पुत्तपाहुड / पुत्तपद)

    - पुत्र-पुत्री, वंश, गृहस्थ जीवन की दृष्टि से धर्माचार की बातें, कुछ स्थानों पर विवादित/लुप्त अंश।

    1. सरावग्गपण्णत्ति (श्रावकप्रज्ञप्ति)

    - श्रावकधर्म – छोटे-बड़े व्रत, प्रतिमा, दान, अनुशासन आदि।

    1. संठार (संथारक / संस्तारक)

    - संलेखना (सल्लेखना), संथारा आदि विषय; मृत्यु की तैयारी, वैर-त्याग, शुद्ध भाव से देह परित्या्ग की विधि।

    1. तैयस्सर (त्रिरश्टि-शालाका पुरुष चरित / तयस्सरिय-पहुड)

    - 63 शलाकापुरुषों के चरित्र (तीर्थंकर, चक्रवर्ती, बलभद्र आदि) – इतिहास, चरित्र, आदर्श जीवन।

    (नामों में थोड़ी उच्चारण/लेखन भिन्नता श्वेताम्बर ग्रन्थ-सूची के अनुसार मिलती है, पर मूल १२ का क्रम यही माना जाता है।)

    ---

    3. १२ उपांगों का इतिहास (संक्षेप में)

    (1) उत्पत्ति

    • ये सभी उपांग, मूल अंग-आगमों (विशेषतः ४ से १२वें अंग से सम्बन्धित) की व्याख्यात्मक, पूरक रचनाएँ हैं।
    • प्रारम्भिक काल में गणधर और उनके शिष्य इन्हें मौखिक रूप से कंठस्थ रखते थे।
    • आगे चलकर विभिन्न परिषदों (वलभी आदि) में इन्हें लिखित रूप में संकलित किया गया (श्वेताम्बर परम्परा का मत)।

    (2) परम्परागत मत – श्वेताम्बर और दिगम्बर

    • श्वेताम्बर परम्परा
    - १२ उपांगों को प्रमाणिक आगम मानती है। - मान्यता: ये भगवान महावीर के उपदेशों पर आधारित हैं, यद्यपि संकलन आगे के आचार्यों/गणधरों द्वारा। - वलभी परिषद के समय (लगभग ५–६वीं शताब्दी CE) इनका लिखित संकलन दृढ़ माना जाता है।
    • दिगम्बर परम्परा
    - दिगम्बर मत में, भगवान महावीर के मूल अंग-आगम ही कालक्रम से लुप्त माने गये हैं; - अतः आज उपलब्ध श्वेताम्बर आगम (जिसमें १२ उपांग भी हैं) को वे मूल-आगम नहीं मानते; इन्हें आगे के आचार्यों की रचनाएँ या परिवर्तित रूप समझते हैं। - दिगम्बर परम्परा में आगम के स्थान पर कुन्दकुन्दाचार्य, उमास्वामी, आचार्य समन्तभद्र, आचार्य अकलंक आदि के ग्रन्थों पर विशेष भरोसा किया जाता है।

    (3) वर्तमान स्थिति

    • श्वेताम्बर मठों, जैन पुस्तकालयों, जैन विद्यापीठों आदि में १२ उपांगों की अनेक प्रतियाँ, टीकाएँ, भाषा-अनुवाद (हिन्दी, गुजराती आदि) मिलते हैं।
    • १२ उपांग, विशेषकर जीवाभिगम, प्रज्ञापन, जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति, सूर्यप्रज्ञप्ति, श्रावकप्रज्ञप्ति, संथारक – आज भी अध्ययन व प्रवचन में बहुत उपयोगी माने जाते हैं।

    ---

    4. संक्षिप्त निष्कर्ष

    • अर्धमागधी आगम साहित्य = भगवान महावीर के उपदेशों को प्राकृत/अर्धमागधी भाषा में संकलित रूप, जिसमें ११ अंग, १२ उपांग आदि सम्मिलित हैं (श्वेताम्बर परम्परा)।
    • १२ उपांग आगम, अंगों के विस्तार और अनुप्रयोग के रूप में – जीव, लोक, कर्म, श्रावकाचार, इतिहास, संलेखना आदि विषयों को सरल भाषा में समझाते हैं।
    • श्वेताम्बर इन्हें वैधिक आगम मानते हैं, जबकि दिगम्बर परम्परा इन्हें मूल-आगम के समकक्ष प्रमाणिक नहीं मानती, बल्कि आगे के ग्रन्थ मानती है।

    ४५ आगमों का संक्षिप्त परिचय आप यहाँ विस्तार से पढ़ सकते हैं:

    About Jain Knowledge

    JainGPT by JainKnowledge.com is India’s first AI-powered platform dedicated entirely to Jainism. Here, you can ask any question related to Jain Dharma — from rituals and history to philosophy and daily practices — and receive instant, accurate answers rooted in Jain principles.

    Our mission is to make Jain knowledge accessible to all, especially the next generation, through the power of technology. Whether you're a curious student or a lifelong seeker, JainGPT is your trusted digital guide for all things Jain.

    Authentic Jain knowledge, made simple and accessible for every generation.
    Follow Us
    Facebook ↗ Instagram ↗

    Stay connected for Jain knowledge, insights and community updates.

    Jain Knowledge

    JainGPT by JainKnowledge.com is India’s first AI-powered platform dedicated entirely to Jainism. Ask questions related to Jain Dharma, rituals, history, philosophy and daily practices, and receive answers rooted in Jain principles.

    Explore
    • JainGPT
    • Jain Directory
    • Jain Media
    • Advertise With Us
    • Disclaimer
    Our Mission

    Our mission is to make Jain knowledge accessible to all, especially the next generation, through the power of technology. Whether you're a curious student or a lifelong seeker, JainGPT is your trusted digital guide for all things Jain.

    info@jainknowledge.com Online support
    Mumbai India

    Copyright © 2026 Jain Knowledge

    Created by Katalyst Corp.