राशि अनुसार संभावित तीर्थंकर और उनके प्रतीक
सबसे पहले एक ज़रूरी बात साफ़ कर लें:
जैन आगमों (शास्त्रों) में “राशि के अनुसार संभावित तीर्थंकर” जैसी कोई सूची या नियम नहीं दिया गया है। यानि –
- फलाने जन्म‑राशि वाला आगे चलकर फलाँ तीर्थंकर बनेगा,
- या १२ राशियों पर अलग‑अलग तीर्थंकर “स्वामी” हैं,
ऐसी बातें ज्योतिष/लोक‑मान्यताओं में मिल सकती हैं, पर यह प्रामाणिक जैन धर्म‑ग्रंथों का सिद्धांत नहीं है।
जैन दर्शन में तीर्थंकर बनना केवल और केवल पुण्य‑पापकर्म, विशेष कर ‘तीर्थंकर नाम‑कर्म’ के बंधन पर निर्भर है, न कि जन्म‑कुंडली या राशि पर।
हाँ, आप तीर्थंकरों और उनके पारम्परिक लांछन (प्रतीक‑चिह्न) जानना चाहें, तो वे यह हैं (वर्तमान चौबीसी):
- श्री ऋषभदेव (आदिनाथ) – बैल
- श्री अजितनाथ – हाथी
- श्री संभवनाथ – घोड़ा
- श्री अभिनंदननाथ – बन्दर
- श्री सुमतिनाथ – चक्र / चकवा पक्षी (परम्परानुसार दोनों मिलते हैं)
- श्री पद्मप्रभु – कमल
- श्री सुपार्श्वनाथ – स्वस्तिक
- श्री चंद्रप्रभु – चन्द्र / चाँद
- श्री पुष्पदन्त (सुविधिनाथ) – मगर (मकर)
- श्री शीतलनाथ – श्रीवत्स चिन्ह
- श्री श्रेयांसनाथ – गेंडा
- श्री वासुपूज्य – भैंस
- श्री विमलनाथ – सूअर (वराह)
- श्री अनंतनाथ – बाज़ / गिध
- श्री धर्मनाथ – वज्र
- श्री शांतिनाथ – हिरन
- श्री कुंथुनाथ – बकरा
- श्री अरनाथ – मछली
- श्री मल्लीनाथ – कलश
- श्री मुनिसुव्रत स्वामी – कछुआ
- श्री नामिनाथ – नीलगाय (गजेल)
- श्री नेमिनाथ – शंख
- श्री पार्श्वनाथ – सर्प (फणाधारी नाग)
- श्री महावीर स्वामी – सिंह
इन लांछनों से ही प्रतिमा‑विग्रह में यह पहचानते हैं कि यह किस तीर्थंकर की मूर्ति है।
निष्कर्ष
- “राशि अनुसार तीर्थंकर” – यह जैन आगम सिद्धांत नहीं है; इसलिए इसे जैन धर्म की आधिकारिक शिक्षा की तरह न मानें।
- जैन दृष्टि से हमें राशि या भविष्य‑फल की अपेक्षा, वर्तमान में सम्यक दर्शन‑ज्ञान‑चारित्र पर ज़ोर देना है – यही आगे चलकर उच्च‑उच्च जन्म, और अन्ततः तीर्थंकर‑पद तक की राह बनाता है।
यदि आप 24 तीर्थंकरों के गुण या और विस्तार से जानकारी पढ़ना चाहें तो आप यह लेख भी देख सकते हैं: “24 Tirthankar qualities”