Jan kin chi
“जं किं चि” असल में एक सूत्र का नाम है – “जं किंचि सूत्र” (Jan Kinchi / Jan Kin Chi Sutra).
1. मूल प्राकृत पाठ (पहली गाथा)
सबसे प्रसिद्ध पहली गाथा इस प्रकार है:
> जं किंचि नाम तित्थं, > सग्गे पायालि मणुस्से लोए। > जाइं जिण बिंबाइं, > ताइं सव्वाइं वंदामि॥
(लिप्यंतरण) Jam kiñchi nāma titthaṃ, sagge pāyāli maṇusse loe। Jāiṃ jiṇa bimbāiṃ, tāiṃ savvāiṃ vandāmi॥
2. सरल अर्थ
बहुत आसान भाषा में इसका अर्थ:
- जहाँ‑जहाँ भी
जिन भगवान के तीर्थ (पवित्र स्थान) हैं, और जहाँ‑जहाँ जिन‑प्रतिमा / जिन‑बिंब स्थित हैं,
- उन सभी तीर्थ स्थानों और सभी प्रतिमाओं को
3. भाव (आध्यात्मिक दृष्टि से)
- हम केवल अपने सामने की मूर्ति या केवल एक मंदिर को नहीं,
- इससे हमारे भीतर
4. प्रयोग कहाँ होता है?
- यह सूत्र कई स्थानों पर मंदिर-पूजा, प्रतिमा-वंदन या यात्रा‑पूजा में बोला जाता है।
- उद्देश्य यही कि – “हे प्रभु! मैं केवल यहाँ नहीं, सारे लोक में स्थित आपके सभी तीर्थों और प्रतिमाओं को नमन करता हूँ।”
यदि आप चाहें तो अगली गाथाएँ और पूरा “जं किंचि सूत्र” भी सरल अर्थ सहित बता सकता हूँ।