Jain bhajans hindi
नीचे कुछ प्रसिद्ध जैन भजन (हिंदी) के नाम और उनका सरल भाव दिया है। आप इन्हें गाकर या सुनकर भाव-वृद्धि कर सकते हैं:
- “प्रभु मेरे अवगुण चित न धरो”
- भाव: हे प्रभु, मेरे दोषों पर ध्यान न दें, मैं शरण में आया हूँ। नम्रता, क्षमा और आत्मचिंतन सिखाने वाला भजन।
- “जिनवाणी अमृत वर्से रे”
- भाव: जिनवाणी (तीर्थंकरों की वाणी) अमृत की तरह है, जो मोक्ष मार्ग दिखाती है। ज्ञान और सम्यक दर्शन का महत्त्व बताता है।
- “हे प्रभु तुम दीनदयाल हो”
- भाव: भगवान को करुणामय, दीनों पर उपकार करने वाला बताते हुए शरणागत भाव व्यक्त किया जाता है।
- “दर्शन कर लो जिनराज का”
- भाव: मंदिर में भगवान जिनेंद्र के दर्शन से चित्त शुद्ध होता है, पाप क्षीण होते हैं – ऐसी भावना वाला भजन।
- “जैन बनकर हमको जीना है”
- भाव: अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह आदि जैन सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है (अधिकतर आधुनिक रचनाएँ हैं)।
- “जिन शरणं गच्छामि” (हिंदी मिश्रित स्तुति रूप में)
- भाव: मैं जिन, धर्म और संघ की शरण लेता हूँ – सम्यक आश्रय लेने की भावना का भजन/स्तवन रूप।
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कैसे उपयोग करें?
- रोज़ाना पूजा या स्वाध्याय के बाद 1–2 भजन भाव से गाएँ।
- अर्थ समझते हुए गाएँ, केवल सुर के लिए नहीं – तभी आध्यात्मिक लाभ अधिक होता है।
- बच्चों को सरल भाषा वाले भजन सिखाकर उनमें भी अहिंसा, संयम, करुणा के संस्कार बैठाए जा सकते हैं।
और जैन भजन व स्तवनों की सूची के लिए आप JainKnowledge की Jain Stavan सेक्शन पर भी देख सकते हैं: