Bhajans in hindi
यहाँ कुछ सुंदर जैन भजन हिन्दी में दे रहा हूँ, जिन्हें आप घर, पाठशाला या सभा में गा सकते हैं।
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1. मंगल जाप – जैन भजन
मंगल जाप (जैन भजन)
- नारायण, नारायण, नारायण रे ।
वीरायण, वीरायण, वीरायण रे ।
- देह-विनाशी, मैं अविनाशी,
अजर अमर पद मेरा रे ।
- श्रमण भगवंत श्री महावीर,
त्रिशला नन्दन हर मेरी पीर ।
- भज महावीर, भज महावीर,
भज मन प्यारे, भज महावीर ।
- अरिहन्त भजो, अरिहन्त भजो,
अरिहन्त बनो, अरिहन्त भजो ।
- भगवंत भजो, भगवंत भजो,
भगवंत बनो, भगवंत भजो ।
- महावीर भजो, महावीर भजो,
महावीर बनो, महावीर भजो ।
अर्थ (सरल भाव): इस भजन में आत्मा की अविनाशी प्रकृति, भगवान महावीर और अरिहंत परमात्मा की भक्ति के द्वारा अपने भीतर शुद्धता, निर्भयता और मंगल भाव जाग्रत करने की प्रेरणा दी गई है।
इस भजन का पूरा पाठ आप यहाँ भी देख सकते हैं: मंगल जाप – जैन भजन
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2. पंच परमेष्ठी की महिमा – जैन भजन
पंच परमेष्ठी की महिमा
जय जय जय जयकार, परमेष्ठी ।
जय-जय भविजन-बोध-विधाता, जय जय आत्म-शुद्धि-विधाता, जय भवभंजनहार, परमेष्ठी ।।
जय सब संकट चूरण कर्ता, जय सब आशा पूर्ण कर्ता, जय जग मंगलकार, परमेष्ठी ।।
तेरा जाप जिन्होंने कीना, परमानन्द उन्होंने लीना, कर गये खेवा परमेष्ठी ।।
लीना शरणा सेठ सुदर्शन, शूली से बन गया सिंहासन, जय जय करें नरनार, परमेष्ठी ।।
द्रोपदी चीर सभा में हरना, तब तेरा ही लीना शरणा, बढ़ गया चीर अपार, परमेष्ठी ।।
सोमा ने तुम सुमरण कीना, सर्प फूल माला कर दीना, वर्ते मंगलाचार, परमेष्ठी ।।
‘अमर’ शरण में संप्रति आया, श्रद्धा की सुमनांजलि लाया, शीघ्र करो उद्धार, परमेष्ठी ।।
अर्थ (सरल भाव): इस भजन में पंच परमेष्ठी (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) की महिमा गाई गई है – जो संसार के सारे दुखों को दूर करते हैं, कल्याण का मार्ग दिखाते हैं और जिनकी शरण लेकर जीव आत्मिक आनंद पाता है।
पूरा भजन यहाँ भी उपलब्ध है: पंच परमेष्ठी की महिमा – जैन भजन
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3. एक बहुत सरल छोटा भजन (बच्चों के लिए भी आसान)
आप चाहें तो यह छोटा भजन रोज़ गा सकते हैं:
सरल जैन भजन
हे अरिहंत देव, हमें राह दिखाओ, पापों से बचा, सन्मार्ग चलाओ ।
हे सिद्ध परमात्मा, निर्मल निरंजन, हमको भी दो थोड़ा निर्मल दर्शन ।
आचार्य-उपाध्याय, साधु भगवान, तुमसे ही समझा धर्म का मान ।
णमोकार मंत्र का जप कराएँ, जीवों पर हम दया भी पाएँ ।
अर्थ (सरल भाव): भगवान अरिहंत, सिद्ध और साधु-व्रती गुरुओं से प्रार्थना है कि वे हमें सही मार्ग दिखाएँ, पापों से बचाएँ और णमोकार मंत्र तथा दया–अहिंसा का भाव हमारे भीतर स्थिर करें।
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यदि आपको किसी विशेष प्रकार का जैन भजन चाहिए (जैसे – महावीर प्रभु पर, पार्श्वनाथ प्रभु पर, पंच परमेष्ठी पर, बच्चों के लिए, आरती शैली में आदि) तो उसी अनुसार भजन का पूरा पाठ भी दिया जा सकता है।