Full slok ,shiv mastu sarv jagat
“शिवमस्तु सर्वजगतः” वाला जो जैन प्रार्थना‑श्लोक प्रचलित है, उसका मुख्य / सम्पूर्ण रूप इस प्रकार है:
मूल श्लोक (जैन प्रार्थना) > शिवमस्तु सर्वजगतः, परहितनिरता भवन्तु भूतगणाः। > दोषाः प्रयान्तु नाशं, सर्वत्र सुखी भवतु लोकः॥
सरल अर्थ (बहुत आसान शब्दों में)
- शिवमस्तु सर्वजगतः – पूरे जगत का कल्याण हो, सबको मंगलमय शांति मिले।
- परहितनिरता भवन्तु भूतगणाः – सभी जीव दूसरे का भला करने में लगे रहें।
- दोषाः प्रयान्तु नाशम् – सबके भीतर के दोष, बुरे संस्कार और पाप नष्ट हो जाएँ।
- सर्वत्र सुखी भवतु लोकः – हर जगह सब लोग सुखी रहें।
इसी के बाद कई लोग सामान्य रूप से यह वैदिक प्रार्थना भी जोड़ते हैं (यह जैन ग्रन्थ‑विशेष की नहीं, पर शुभकामना के रूप में बोली जाती है):
> सर्वेऽपि सन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। > सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्॥
इस पूरी प्रार्थना का भाव जैन धर्म के सर्वजीव करुणा, अहिंसा और परहित के सिद्धांत से पूरी तरह मेल खाता है – हम केवल अपने नहीं, हर जीव के कल्याण की कामना करते हैं।
और विस्तार से पढ़ने के लिए आप यहाँ देख सकते हैं: “Shivamastu Sarvajagatah” प्रार्थना