Rahendra suri marasab path parampara
आप “राजेन्द्र सूरी महाराज की मरसाब पाठ (पंथ) परम्परा” पूछ रहे हैं। संक्षेप में, राजेन्द्र गच्छ की मुख्य आचार्य‑परम्परा (path parampara) इस प्रकार मानी जाती है (श्वेताम्बर, त्रिस्तुतिक/आगमिक परम्परा):
- आचार्य श्रीमद् राजेन्द्रसूरि जी
- जन्म: लगभग 1837 ई. (विक्रम संवत् 1894 के आसपास, स्थान – भरतपुर) - दीक्षा: बचपन में (लगभग 1850 ई.) - आचार्य पद: लगभग 1880 ई. - स्वर्गवास: 21 दिसम्बर 1906
ये राजेन्द्र गच्छ (Tristutik / Agamik परम्परा) के प्रमुख आचार्य और बड़े सुधारक माने जाते हैं।
- आचार्य रत्नसुन्दर सूरी जी – (राजेन्द्रसूरि जी के प्रमुख शिष्य)
- जन्म: लगभग 1867 ई. - दीक्षा: लगभग 1882 ई. - आचार्य पद: 1907 ई. - स्वर्गवास: 1927 ई.
- आचार्य भुवनसुन्दर सूरी जी
- जन्म: लगभग 1887 ई. - दीक्षा: 1902 ई. - आचार्य पद: 1928 ई. - स्वर्गवास: 1958 ई.
- आचार्य ज्ञानसुन्दर सूरी जी
- जन्म: लगभग 1915 ई. - दीक्षा: 1931 ई. - आचार्य पद: 1958 ई. - स्वर्गवास: 1972 ई.
- आचार्य आनंदसागर सूरी जी
- जन्म: लगभग 1932 ई. - दीक्षा: 1950 ई. - आचार्य पद: 1972 ई. - स्वर्गवास: 2008 ई.
इसके आगे भी राजेन्द्र गच्छ में आचार्य और गच्छाधिपति बने हैं, पर सामान्य रूप से “राजेन्द्र सूरी मरसाब पंथ/पाठ परम्परा” कहते समय ऊपर के नाम सबसे ज़्यादा बताये जाते हैं। अलग‑अलग ग्रन्थों में वर्षों व तिथियों में थोड़ा अन्तर मिल सकता है, पर परम्परा का क्रम यही माना जाता है।