Jain Knowledge
Menu
  • JainGPT
  • Jain Directory
    • Jain Tirthsthaans
    • Jain Sangeetkars
    • Jain Pandits
    • Jain Acharya
    • Jain Businessman
  • Jain Media
    • Jain Stavan
    • Jain Pachkhan
    • Jain Stories
    • Jain Sutras
    • Jain Facts / Concepts
  • Advertise with us
Jain Knowledge
login Register

Get In Touch

phone
info@jainknowledge.com

online support

phone
Mumbai

India

  • Home
  • Jain Questions
  • ALL 24 TIRTHANKAR BHAGWAN CHARITRA
  • author Posted by
    Jain Follower

    ALL 24 TIRTHANKAR BHAGWAN CHARITRA

    6 months ago 130

    नीचे सभी 24 तीर्थंकर भगवंतों का बहुत संक्षिप्त व सरल चरित्र (जीवन‑परिचय) दिया है –

    ---

    1. भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ)

    • काल: वर्तमान अवसर्पिणी के प्रथम तीर्थंकर
    • जन्मस्थान: अयोध्या
    • पिता–माता: नाभिराज – मरुदेवी
    • विशेष:
    - पहले तीर्थंकर, आदिनाथ – इन्हीं से “धर्म–तप–संयम” की परंपरा शुरू मानी जाती है। - लोक में खेती, लिपि, व्यापार, विवाह आदि अनेक कलाएँ सिखाईं – इसलिए “नाभि कुमार” के पुत्र के रूप में आदि‑नायक।
    • दीक्षा: बहुत बड़ा राज्य छोड़कर वैराग्य लेकर दीक्षा ग्रहण की।
    • कैवल्य & मोक्ष: समवसरण स्थापित कर उपदेश दिया; कैलाश पर्वत पर मोक्ष।

    ---

    2. भगवान अजितनाथ

    • जन्मस्थान: अयोध्या
    • पिता–माता: जितशत्रु राजा – विजयादेवी
    • विशेष:
    - नाम का अर्थ – “जो कभी पराजित न हो” (अजित)। - अत्यंत शान्त, अहिंसा‑मयी चर्या; बहुत से राजाओं ने उनके उपदेश से युद्ध छोड़ दिए।
    • मोक्ष: समे श्रिखर (पारसनाथ पर्वत) पर।

    ---

    3. भगवान सम्भवनाथ

    • जन्मस्थान: श्रावस्ती
    • पिता–माता: जितारी – सिनीदेवी
    • विशेष:
    - जन्म के समय अनेक शुभ शकुन हुए – इसलिए नाम “सम्भव” (मंगल‑संपन्न)। - दया, करुणा और दान की मूर्ति; बहुत से नरक–गामी जीवों का मार्ग मोड़ा।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    4. भगवान अभिनंदनस्वामी

    • जन्मस्थान: अयोध्या
    • पिता–माता: सम्भू – सिद्धार्था
    • विशेष:
    - उनके जन्म से प्रजा को बड़ी “अभिनन्दनीय” प्रसन्नता हुई, इसलिए नाम अभिनन्दन। - अत्यंत सरल, अल्प‑इच्छा, संतोषपूर्ण जीवन का उपदेश।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    5. भगवान सुमतिनाथ

    • जन्मस्थान: अयोध्या
    • पिता–माता: मेघराज – मङ्गलादेवी
    • विशेष:
    - “शुभ मत (सुमति)” सिखाने वाले – सम्यक दर्शन–ज्ञान–चारित्र की शिक्षा। - अनेक शिष्यों को मिथ्या‑दर्शन से हटा कर सम्यक मार्ग पर लाया।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    6. भगवान पद्मप्रभु

    • जन्मस्थान: काकंधी (कौशाम्बी क्षेत्र)
    • पिता–माता: श्रीधर राजा – सुशीमा रानी
    • विशेष:
    - शरीर व तेज कमल के समान होने से “पद्मप्रभ” नाम। - शान्ति, सौम्यता और सौन्दर्य का प्रतीक; राग‑द्वेष से रहित जीवन।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    7. भगवान सुपार्श्वनाथ

    • जन्मस्थान: बनारस (वाराणसी)
    • पिता–माता: प्रभाकर – प्रद्यु‍म्ना
    • विशेष:
    - उनके चरणों से अनेक लोगों के कष्ट “दूर हो गए” – अत: सुपार्श्व (श्रेष्ठ उपकार करने वाले)। - तप, संयम और क्षमा की अद्भुत साधना।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    8. भगवान चंद्रप्रभु

    • जन्मस्थान: चंद्रपुर (चंद्रपुर–सम्बद्ध क्षेत्र)
    • पिता–माता: महासेन – लक्ष्मणा
    • विशेष:
    - चन्द्रमा के समान शीतल, चमकदार कांति – इसलिए “चन्द्रप्रभु”। - क्रोध और हिंसा को “शीतल” करने वाला उपदेश – शमन‑भाव की शिक्षा।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    9. भगवान पुष्पदंत / सुविदिनाथ

    (कुछ परंपराओं में “पुष्पदंत”, श्वेताम्बर परंपरा में अधिक प्रचलित “सुविदिनाथ”)
    • जन्मस्थान: काकंधी / विस्तृत क्षेत्र उल्लेखित
    • पिता–माता: सुगृह राजा – राणी
    • विशेष:
    - जन्म के समय पुष्प‑वृष्टि – इसलिए पुष्पदंत; - या बहुत शुभ “शुभ दिन” होने से सु‑विदिनाथ।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    10. भगवान शीतलनाथ

    • जन्मस्थान: भद्रिलपुर
    • पिता–माता: द्रढरथ – नंदा
    • विशेष:
    - नाम ही बताता है – “शीतलता” (अहिंसा, क्षमा, संतोष)। - बहुत उग्र और हिंसक लोगों के मन को भी शीतल किया।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    11. भगवान श्रेयांसनाथ

    • जन्मस्थान: श्रेयांसपुर
    • पिता–माता: विष्णु – विष्णु देवी
    • विशेष:
    - जीवों के “श्रेय” (परम कल्याण) का मार्ग दिखाने वाले। - दान, शील और तप – तीनों का समन्वित उपदेश।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    12. भगवान वासुपूज्य

    • जन्मस्थान: चम्पापुरी (बिहार)
    • पिता–माता: वसुपाल – जयदेवी
    • विशेष:
    - देवों द्वारा भी “पूजित” – इसलिए “वासुपूज्य”। - बचपन से ही अत्यंत वैराग्यवान; अल्पायु में ही दीक्षा लेकर तीव्र तप किया।
    • मोक्ष: चम्पापुरी में ही (अनेक परंपराएँ समे श्रिखर भी कहती हैं; मुख्य मत में चम्पापुरी स्वीकार)।

    ---

    13. भगवान विमलनाथ

    • जन्मस्थान: कामलपुर
    • पिता–माता: कृत्तिवर्मा – श्यामा
    • विशेष:
    - “विमल” – निर्मल; राग‑द्वेष की मलिनता से रहित आत्म‑स्थिति की शिक्षा। - बहुजन को संयम मार्ग में प्रवृत्त किया।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    14. भगवान अनंतनाथ

    • जन्मस्थान: कामलपुर
    • पिता–माता: सिम्हासेन – श्रीदेवी
    • विशेष:
    - “अनन्त सुख (मोक्ष)” का मार्ग दिखाने वाले, hence अनंतनाथ। - अनेक श्रावकों–साधुओं के अनंत भावों का कल्याण।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    15. भगवान धर्मनाथ

    • जन्मस्थान: रत्नपुर
    • पिता–माता: भवानीराज – सुनीति
    • विशेष:
    - “धर्म” (सम्यक आचरण) को जीवन में उतारने की प्रेरणा देने वाले। - उनके उपदेश से राज्य में अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य का वातावरण।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    16. भगवान शांतिनाथ

    • जन्मस्थान: हस्तिनापुर
    • पिता–माता: विश्वसेन – आचार्यदेवी
    • विशेष:
    - “शान्ति के अवतार” – नाम के अनुसार जगत में शान्ति स्थापन की भावना। - कई युद्धरत राजाओं ने उनके प्रभाव से युद्ध छोड़ दिया।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    17. भगवान कुण्थुनाथ

    • जन्मस्थान: हस्तिनापुर
    • पिता–माता: सुरसेन – श्रीदेवी
    • विशेष:
    - जन्म से ही अध्यात्म की ओर झुकाव; राजसुखों से वैराग्य। - उनके समय में अनेक जनों ने अनिर्जरा‑कारक कर्मों को त्यागा।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    18. भगवान अरनाथ

    • जन्मस्थान: हस्तिनापुर
    • पिता–माता: सुधर्मा – देवी
    • विशेष:
    - “अर” – शत्रु; “अरनाथ” – आंतरिक शत्रु (राग‑द्वेष) पर विजय पाने की शिक्षा देने वाले। - महान तपस्वी, अत्यंत अल्प भोग, अधिक से अधिक उपशम‑भाव।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    19. भगवान मल्लिनाथ

    • जन्मस्थान: मिथिला
    • पिता–माता: कुभल – प्रभाराणी
    • विशेष:
    - अतिशय विरक्त; बचपन से ही वैराग्य के भाव। - - परंपरा‑भेद: - दिगंबर परंपरा: मल्लिनाथ को पुरुष मानती है। - श्वेताम्बर परंपरा: मल्लिनाथ को स्त्री‑देह में जन्मा तीर्थंकर मानती है।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    20. भगवान मुनिसुव्रत स्वामी

    • जन्मस्थान: राजगृह (राजगृह/राजगृह‑प्रांत)
    • पिता–माता: सुमित्र – पद्मावती
    • विशेष:
    - “मुनि जैसा सुव्रत रखने वाले” – अत्यधिक व्रत‑पालन की प्रेरणा। - घोर तप और अनेक उपवास – लोक को तप की महिमा समझाई।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    21. भगवान नामिनाथ

    • जन्मस्थान: मिथिला
    • पिता–माता: विजय – विप्रा
    • विशेष:
    - विवाह के समय युद्ध की तैयारियाँ देख कर वैराग्य जगा; वहीं से राज्य–परिवार छोड़कर दीक्षा। - नाम का अर्थ – अनेक शुभ “नाम–यश” फैलाने वाले।
    • मोक्ष: समे श्रिखर।

    ---

    22. भगवान नेमिनाथ (अरिष्टनेमि)

    • जन्मस्थान: सोरठ क्षेत्र, शौरिपुर (आज का जूनागढ़ क्षेत्र)
    • पिता–माता: समुद्ध – शिवा देवि
    • विशेष:
    - श्रीकृष्ण के चचेरे भाई माने जाते हैं (जैन ग्रंथों में वर्णित)। - विवाह के समय देखा कि पशुओं को बलि के लिए बाँधा गया है; गहरे करुणा‑वैराग्य से विवाह त्याग दिया और गिरनार पर्वत पर दीक्षा ले ली। - गहन तपस्या से केवलज्ञान प्राप्त।
    • मोक्ष: गिरनार पर्वत पर।

    ---

    23. भगवान पार्श्वनाथ

    • जन्मस्थान: वाराणसी (कांशी)
    • पिता–माता: अश्वसेन राजा – वामा देवी
    • विशेष:
    - 23वें तीर्थंकर; इतिहास में भी अपेक्षाकृत निकट। - युवावस्था से ही करुणा और अहिंसा – एक बार तपस्वी द्वारा अग्नि में जलते सर्प को बचाया, वहाँ से घोर अहिंसा‑वैराग्य जागृत। - “चत्वारिंशत् (4) महाव्रत” की परंपरा को और स्पष्ट रूप से प्रस्थापित किया। - उनके अनुयायी “नागरों, पार्श्व परंपरा” आदि नामों से प्रसिद्ध रहे।
    • मोक्ष: समे श्रिखर (पारसनाथ पर्वत, झारखंड)।

    ---

    24. भगवान महावीर स्वामी

    • जन्मस्थान: कुंडलपुर (वैशाली के निकट – आज का बिहार)
    • पिता–माता: सिद्धार्थ राजा – त्रिशला देवी
    • विशेष:
    - वर्तमान के अंतिम (24वें) तीर्थंकर। - 30 वर्ष की आयु में राज्य, धन, परिवार सब छोड़कर दीक्षा; 12½ वर्ष घोर तप – किंचित भी हिंसा न हो, ऐसा अतिशय सावधान जीवन। - ऋजु‑लोक में केवलज्ञान प्राप्त; 72 वर्ष की आयु तक धर्मोपदेश देते रहे। - उन्होंने जैन धर्म के पाँच महाव्रत – अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह – को स्पष्ट रूप से सांगोपांग रूप दिया।
    • निर्वाण (मोक्ष): पावापुरी (बिहार) में कार्तिक अमावस्या की रात्रि (दीपावली), जहाँ आज जलमंदिर प्रसिद्ध है।

    ---

    यह 24ों तीर्थंकरों का बहुत संक्षिप्त चरित्र है – केवल मुख्य बिंदु: जन्मस्थान, भाव, विशेषता व मोक्ष‑स्थान।

    यदि आपको किसी एक‑एक तीर्थंकर का विस्तृत चरित्र (जैसे 14 स्वप्न, लक्षण, ऊंचाई, आयु, चिह्न, यक्ष–यक्षिणी आदि) अलग‑अलग चाहिए हों, तो उनके लिए भी परंपरागत जैन ग्रंथों के आधार पर विस्तार से दिया जा सकता है।

    About Jain Knowledge

    JainGPT by JainKnowledge.com is India’s first AI-powered platform dedicated entirely to Jainism. Here, you can ask any question related to Jain Dharma — from rituals and history to philosophy and daily practices — and receive instant, accurate answers rooted in Jain principles.

    Our mission is to make Jain knowledge accessible to all, especially the next generation, through the power of technology. Whether you're a curious student or a lifelong seeker, JainGPT is your trusted digital guide for all things Jain.

    Authentic Jain knowledge, made simple and accessible for every generation.
    Follow Us
    Facebook ↗ Instagram ↗

    Stay connected for Jain knowledge, insights and community updates.

    Jain Knowledge

    JainGPT by JainKnowledge.com is India’s first AI-powered platform dedicated entirely to Jainism. Ask questions related to Jain Dharma, rituals, history, philosophy and daily practices, and receive answers rooted in Jain principles.

    Explore
    • JainGPT
    • Jain Directory
    • Jain Media
    • Advertise With Us
    • Disclaimer
    Our Mission

    Our mission is to make Jain knowledge accessible to all, especially the next generation, through the power of technology. Whether you're a curious student or a lifelong seeker, JainGPT is your trusted digital guide for all things Jain.

    info@jainknowledge.com Online support
    Mumbai India

    Copyright © 2026 Jain Knowledge

    Created by Katalyst Corp.