Shashwat viharmaan konse
“Shashwat Viharmaan” (शाश्वत विहारमान) का अर्थ है—जो सदा (शाश्वत) गतिशील (विहारमान) है। जैन दर्शन के अनुसार, केवल आत्मा (जीव) और पुद्गल (पदार्थ) ही सदा गतिशील रहते हैं, अर्थात वे निरंतर गमनशील हैं। विशेषतः, यह शब्द आत्मा के उस स्वरूप को इंगित करता है, जो संसार में अनादि-अनंत काल से विभिन्न योनियों में भ्रमण करता रहता है—जन्म और मरण के चक्र में बंधा रहता है।
इसका उल्लेख जैन आगमों में भी मिलता है:
- जीव: शाश्वत विहारमान, क्योंकि वह कर्म के बंधन के कारण संसार में चौरासी लाख योनियों में विचरण करता रहता है।
- पुद्गल (पदार्थ): निरंतर परिवर्तित और गतिशील रहता है, इसलिए इसे भी शाश्वत विहारमान कहा गया है।
सारांश: शाश्वत विहारमान वे जीव/तत्त्व हैं, जो संसार में निरंतर गतिशील और भ्रमणशील हैं—मुख्यतः जीव और पुद्गल।