Shashwat viharmaan konse hai
जैन धर्म के अनुसार "शाश्वत विहारमान" (शाश्वत विहारमान तीर्थ) वे तीर्थ हैं जो सदा स्थायी रहते हैं, अर्थात् जो कभी नष्ट नहीं होते। शाश्वत का अर्थ है "सदा रहने वाला" और विहारमान का अर्थ है "जहाँ तीर्थंकर भगवान ने विहार (गमन) किया हो या मोक्ष प्राप्त किया हो"।
जैन आगमों के अनुसार, शाश्वत विहारमान तीर्थ मुख्यतः दो माने जाते हैं:
- समवशरण (समवसरण): प्रत्येक तीर्थंकर के केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद, वे जिस स्थल पर उपदेश देते हैं, वहाँ एक दिव्य सभा (समवशरण) बनती है। यह स्थान शाश्वत विहारमान माना जाता है, क्योंकि वहाँ धर्म का चिरस्थायी प्रवचन हुआ है।
- शिखरजी (पारसनाथ हिल): जैन परंपरा में माना जाता है कि यहाँ कई तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया, अतः यह स्थल भी शाश्वत विहारमान तीर्थ है।
मुख्य शाश्वत विहारमान तीर्थ:
- श्री सम्मेद शिखरजी (गिरिडीह, झारखंड): 20 तीर्थंकरों के मोक्षस्थल।
- श्री गिरनारजी (गुजरात): नेमिनाथ भगवान का मोक्षस्थल।
- श्री पावापुरी (बिहार): महावीर स्वामी का निर्वाण स्थल।
- श्री चंद्रगिरि एवं इंद्रगिरि (श्रवणबेलगोला, कर्नाटक): बाहुबली का समाधि स्थल।
- श्री शत्रुंजय (पालिताणा, गुजरात): आदिनाथ भगवान का निर्वाण स्थल।
सारांश: शाश्वत विहारमान तीर्थ वे हैं, जहाँ तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया या जहाँ उनका समवशरण हुआ। ये तीर्थ जैन धर्म में अत्यंत पवित्र माने जाते हैं और इनका महत्व शाश्वत है।