चैबीसे जिन ना, सर्व साधवी सार । अड़तालीस लाख ने, आठ से सत्तर हजार ।।104।। arth badi sadhu vandana
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इस पंक्ति का सरल अर्थ (अर्थ) –
“चैबीसे जिन ना, सर्व साधवी सार । अड़तालीस लाख ने, आठ से सत्तर हजार ।।104।।”
अर्थ: चौबीसों जिन (चौबीस तीर्थंकरों) के समय में रहने वाली, उन सब की परम्परा की सभी साध्वियाँ – जो सच में साध्वी-धर्म का सार, आदर्श और मूल रूप हैं – ऐसी अनगिनत साध्वियों को (जिनकी संख्या को कवि ने संकेत रूप से “अड़तालीस लाख और आठ से सत्तर हज़ार” जैसा बहुत बड़ा आँकड़ा कहा है) मैं नमस्कार करता/करती हूँ, उनकी वंदना करता/करती हूँ।
संक्षेप में – यह श्लोक बड़ी साधु वंदना में सभी साध्वी–भगवंतों के प्रति गहन श्रद्धा व्यक्त करता है, कि चौबीसों जिनों की परम्परा की असंख्य साध्वियाँ, जो व्रत, संयम, त्याग और शील की मूर्ति हैं, उन सबको हम नम्र भाव से प्रणाम करते हैं।