Pani no kal
“Pāṇī no kāl” (પાણીનો કલ) शब्द Jains में आम बोलचाल का है, मतलब:
पानी के जीवों की हिंसा से बँधने वाला पाप / कर्म।
1. Jain दृष्टि से पानी क्या है?
- पानी एक‑इन्द्रिय जीव (अप्काय जीव) है।
- हर बूंद में असंख्य जीव होते हैं।
- जब हम बिना सोचे‑समझे पानी बहाते हैं, छपकाते हैं, गरम पानी फेंकते हैं, तो बहुत‑से जलजीव मरते हैं – यही “पानी नो काल” कहलाता है।
2. “पानी नो काल लाग्यो” किसको कहते हैं?
नीचे जैसी बातें करने से “पानी नो काल” का पाप बढ़ता है:
- नल खुला छोड़ देना, जरूरत से ज्यादा पानी बहाना
- नहाते समय, बरतन धोते समय बहुत पानी बर्बाद करना
- बेकार में पानी से खेलना, छप‑छप करना
- गरम पानी, साबुन वाला, केमिकल वाला पानी नाली में यूँ ही बहा देना
- रात में बिना जरूरत के बार‑बार पानी लेना/फेंकना (अधंकार में और भी ज्यादा जीव मरते हैं)
इन सब से अप्काय जीवों की हिंसा होती है, उसका सूक्षम पाप = “पानी नो काल”।
3. Jain तरीके से पानी का उपयोग कैसे करें?
- हमेशा जरूरत भर ही पानी लें
- नहाने, कपड़े धोने, बर्तन धोने में बाल्टी से काम लें, शॉवर/खुला नल कम से कम
- नल की लीकेज तुरंत ठीक करवाएँ
- पानी को बेकार न बहाएँ, जहाँ हो सके, पेड़‑पौधों में डालें
- पीने का पानी छानकर / उबालकर, ठंडा करके लें, और रात में यथासंभव कम लें
संक्षेप में: जितनी कम पानी की हिंसा, उतना कम “पानी नो काल” और उतनी अधिक अहिंसा।