Jain Knowledge
Menu
  • JainGPT
  • Jain Directory
    • Jain Tirthsthaans
    • Jain Sangeetkars
    • Jain Pandits
    • Jain Acharya
    • Jain Businessman
  • Jain Media
    • Jain Stavan
    • Jain Pachkhan
    • Jain Stories
    • Jain Sutras
    • Jain Facts / Concepts
  • Advertise with us
Jain Knowledge
login Register

Get In Touch

phone
info@jainknowledge.com

online support

phone
Mumbai

India

  • Home
  • Jain Questions
  • Shantinath vidhan procedure
  • author Posted by
    Jain Follower

    Shantinath vidhan procedure

    5 months ago 134

    Shantinath Vidhan is usually done as “Shri Shantinath Mandal Vidhan” – a special pooja of Bhagwan Shantinath for shanti (peace) and kalyan. Procedure can be long/short and also varies a little by sangh, so I’ll give a simple, safe, samanya (general) क्रम you can follow at home.

    ---

    1. तैयारी (Preparation)

    1. स्थान तैयार करें

    - साफ़, शान्त जगह चुनें - चावल या सफेद कपड़े पर छोटा मंडल / चौकी बनायें - बीच में श्री शान्तिनाथ भगवान का चित्र/प्रतिमा स्थापित करें

    1. सामग्री (basic)

    - जल, अक्षत (चावल), फूल, दीपक, अगरबत्ती - थोड़ी-सी केसर/चंदन, रोली, नारियल या सूखे मेवे - यदि संभव हो: द्रव्यों से अष्ट-प्रकारी पूजन (जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल)

    1. स्वच्छता

    - स्नान, स्वच्छ वस्त्र, मन में शांत भावना - मन में अहिंसा, क्षमा, मैत्री की भावना रखें

    ---

    2. प्रारम्भ – नमस्कार और संकल्प

    1. नवकार मंत्र / पंच-परमेष्ठी नमस्कार

    - सबसे पहले नवकार मंत्र या पंच-परमेष्ठी को नमस्कार करें - फिर विशेष रूप से भगवान शान्तिनाथ को प्रणाम

    1. संकल्प (man mein)

    - “मैं आज भगवान शान्तिनाथ की पूजा / विधान शान्ति, सद्बुद्धि और सब जीवों के कल्याण के लिए कर रहा/रही हूँ, न किसी को हानि पहुँचाने के लिए और न केवल सांसारिक लाभ के लिए।”

    ---

    3. स्तापना और मंगलाचरण

    1. आसन व स्तापना

    - भगवान के सामने दाहिने हाथ से थोड़े अक्षत रखकर - मंदिर, देव, शास्त्र, गुरु और भगवान शान्तिनाथ की स्तापना-भावना करें

    1. मंगल पाठ (short)

    - नवकार मंत्र - “उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच…” जैसे गुणस्मरण, या - छोटा-सा शान्तिकर्म / शान्तिकारक श्लोक (जैसे “सर्वे भवन्तु सुखिनः” प्रकार की सार्वभौमिक शुभकामना – जैन शैली में सब जीवों के मंगल की भावना)

    ---

    4. अभिषेक (यदि सम्भव हो)

    यदि आपके पास छोटी प्रतिमा है और घर पर अभिषेक करना आपकी परम्परा में मान्य है:

    1. जलग्रहण

    - स्वच्छ पात्र में जल लें, - भगवान के ऊपर धीरे-धीरे जलाभिषेक करें - साथ में नवकार मंत्र या “ओम् ह्रीं शान्तिनाथाय नमः” जैसे पारम्परिक जप (यदि आपके घर में बोला जाता हो)

    1. पोंछना व चंदन

    - साफ रुमाल से प्रतिमा पोंछें - चंदन/केसर का तिलक लगायें

    यदि प्रतिमा पर अभिषेक न हो सके (केवल चित्र हो), तो बस जल की आचमन-भावना करें – जल को भगवान के नाम से अपने सिर से लगा लें, और मन में सोचें “अभिषेक भगवान पर चढ़ा हुआ मानता/मानती हूँ।”

    ---

    5. अष्ट-प्रकारी पूजन (सरल रूप)

    क्रम सामान्यतः (थोड़ी भिन्नता हो सकती है):

    1. जल – पवित्रता की भावना से
    2. चंदन – शीतलता, शान्ति, समाधि की भावना
    3. अक्षत – स्थिरता, अविच्छिन्न श्रद्धा
    4. पुष्प – सद्गुणों की सुगंध
    5. धूप – पाप- मलिनता दूर हो, ऐसा भाव
    6. दीपक – सम्यक् ज्ञान का प्रकाश प्रकट हो
    7. नैवेद्य / फल / मिठाई – आसक्ति छोड़कर, केवल भाव से अर्पण
    8. (जहाँ जैसा प्रचलन हो उसी के अनुसार अनुकरण करें)

    हर द्रव्य चढ़ाते समय:

    • कम से कम नवकार मंत्र
    • या भगवान शान्तिनाथ के नाम का जप करें

    ---

    6. शान्तिनाथ सम्बन्धी पाठ / स्तुति

    घर पर सरल रूप से आप यह कर सकते हैं:

    1. भगवान शान्तिनाथ का गुणानुशालन

    - जैसे: - “हे शान्तिनाथ भगवान, आप अनन्त ज्ञान- दर्शन से युक्त, सम्यक् शान्ति स्वरूप हैं…” - अपने शब्दों में भी कह सकते हैं – मुख्य बात है श्रद्धा और शान्ति-भावना।

    1. कोई पारम्परिक स्तुति / सूत्र

    - आपके घर या स्थानीय परम्परा अनुसार: - “शान्तिकारम / शान्तिकरम् सूत्र” - या “शान्तिनाथ स्तवन / मण्डल विधान के श्लोक” - यदि आपको पूरा टेक्स्ट चाहिए, वही साइट पर संक्षिप्त मार्गदर्शन उपलब्ध है – और वहीं से आप अपने घर की परम्परा के अनुसार श्लोक चुन सकते हैं। - आप अधिक पढ़ सकते हैं यहाँ:

    ---

    7. शान्ति-पाठ और विश्व-कल्याण भावना

    1. सर्व-जीव-कल्याण भावना

    - मन में या शब्दों में: - “सभी जीवों की हिंसा रुके, रोग-दुःख दूर हों, सबको सम्यक् दर्शन-ज्ञान-चारित्र की प्राप्ति हो।”

    1. क्षमा-प्रार्थना (Kshamapana)

    - “हे भगवन, इस विधान में मुझसे मन, वचन, काय से जो भी गलती हुई हो, जानकर या अनजाने, उसकी मैं क्षमा माँगता/माँगती हूँ।”

    1. शान्ति मंत्र / मंगल पाठ से समापन

    - नवकार मंत्र - “खमेमि सव्वे जीवाणं…” (यदि परम्परा हो) - अंत में तीन बार “शान्ति, शान्ति, शान्ति” की भावना रखें – लेकिन ध्यान रहे: यह अन्तरिक शान्ति और सब जीवों के कल्याण के लिए हो, केवल सांसारिक लाभ के लिए नहीं।

    ---

    8. दीपक, आरती और विसर्जन-भावना

    1. आरती (यदि आपके घर में प्रचलन हो)

    - भगवान के सामने दीपक घुमाकर आरती गायन/पाठ करें

    1. मंडल / स्तापना विसर्जन-भावना

    - मन में सोचें: - “जिनाचार्य की आज्ञा से, मैंने जो अल्प-पूजा की, वह भगवान को अर्पित करके अब मैं इसे समाप्त करता/करती हूँ। भगवान मेरे और सब जीवों का कल्याण करें।”

    ---

    9. परम्परा (Digambar / Shwetambar) के भेद

    • श्वेताम्बर परम्परा
    - “शान्तिनाथ मण्डल विधान” के अलग-अलग ग्रन्थ स्वरूप हैं, जिनमें विशेष गाथाएँ, मण्डल रचना, न्यास, पाठ का क्रम विस्तृत मिलता है। - मंदिरों में प्रायः पूरा विधान गुरु / पण्डित के मार्गदर्शन में होता है।
    • दिगम्बर परम्परा
    - सामान्यत: “शान्ति विधान / शान्ति पाठ” के रूप में अभिषेक + शान्तिकारक स्तवन + सार्व-जीव-कल्याण प्रार्थना पर ज़ोर होता है। - पूरा विस्तृत विधान भी होता है, पर घर पर प्रायः लघु विधान ही किया जाता है।

    घर पर, यदि आपको पूरी पुस्तिकानुसार करना हो, तो सबसे अच्छा है:

    • अपने स्थानीय मन्दिर / पंडित / आचार्य-परम्परा से स्वीकृत “श्री शान्तिनाथ विधान” की पुस्तक लेकर
    • उसी के अनुसार क्रम, मंत्र और समय-समय पर की जाने वाली निष्ठा करें।

    ---

    यह क्रम एक सरल, सुरक्षित और शास्त्रीय भावना वाला गृह-विधान का ढांचा है। असली फल मन की शान्ति, अहिंसा, क्षमा और तत्त्व-चिन्तन से आता है – द्रव्य (सामान) से नहीं।

    About Jain Knowledge

    JainGPT by JainKnowledge.com is India’s first AI-powered platform dedicated entirely to Jainism. Here, you can ask any question related to Jain Dharma — from rituals and history to philosophy and daily practices — and receive instant, accurate answers rooted in Jain principles.

    Our mission is to make Jain knowledge accessible to all, especially the next generation, through the power of technology. Whether you're a curious student or a lifelong seeker, JainGPT is your trusted digital guide for all things Jain.

    Authentic Jain knowledge, made simple and accessible for every generation.
    Follow Us
    Facebook ↗ Instagram ↗

    Stay connected for Jain knowledge, insights and community updates.

    Jain Knowledge

    JainGPT by JainKnowledge.com is India’s first AI-powered platform dedicated entirely to Jainism. Ask questions related to Jain Dharma, rituals, history, philosophy and daily practices, and receive answers rooted in Jain principles.

    Explore
    • JainGPT
    • Jain Directory
    • Jain Media
    • Advertise With Us
    • Disclaimer
    Our Mission

    Our mission is to make Jain knowledge accessible to all, especially the next generation, through the power of technology. Whether you're a curious student or a lifelong seeker, JainGPT is your trusted digital guide for all things Jain.

    info@jainknowledge.com Online support
    Mumbai India

    Copyright © 2026 Jain Knowledge

    Created by Katalyst Corp.