Upwas me saata puchne par kya uttar dena chahie
जैन धर्म में उपवास (उपवास) करते समय "साता" पूछी जाती है, जिसका अर्थ है—कोई पूछता है कि उपवास में आपको कितनी कष्ट या पीड़ा (साता) हो रही है। इसका उत्तर विनम्रता, संयम और संतोष भाव से देना चाहिए। सामान्यतः उत्तर दिया जाता है:
"साता नथी" (साता नहीं है), या "परमात्मा की कृपा है, कोई साता नहीं है।"
इसका अर्थ है कि मुझे कोई कष्ट नहीं है, मैं परमात्मा की कृपा से ठीक हूँ। ऐसा उत्तर देना अहंकार से दूर रहता है और उपवास का सही भाव प्रकट करता है। यदि सच में कोई अत्यधिक शारीरिक कष्ट है तो भी विनम्रता से, क्रोध या शिकायत के भाव के बिना उत्तर देना चाहिए। मुख्य बात है—संतोष और संयम का भाव बनाए रखना।
नोट: साता की चर्चा करने या उसका प्रदर्शन करने से उपवास का फल क्षीण हो सकता है, अतः यथासंभव सकारात्मक, विनम्र और संयमित उत्तर देना चाहिए।