How to do 108 Parasnath ekasan
108 पार्श्वनाथ एकासन = भगवान पार्श्वनाथ के नाम से 108 बार एकासन का तप।
नीचे बहुत सरल तरीके से समझिए – घर पर करने लायक साधारण विधि बता रहा हूँ। अलग-अलग संघ/परंपरा में थोड़े नियम बदल सकते हैं, इसलिए अपने गुरु / स्थानक / मंदिर के नियम भी ज़रूर मानें।
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1. 108 पार्श्वनाथ एकासन क्या है?
- 108 दिन तक (अधिकतर लगातार) रोज़ एक बार भोजन (एकासन) करना
- हर दिन विशेष रूप से भगवान पार्श्वनाथ की पूजा / स्तुति / जप करना
- इसे “108 पार्श्वनाथ तप” भी कहा जाता है – बहुत शक्तिशाली पुण्यकारी तप माना जाता है
कुछ लोग 108 दिन लगातार करते हैं, कुछ बीच में स्वास्थ्य या स्त्री धर्म के कारण विराम लेकर आगे जोड़ते हैं – यह अपनी क्षमता और गुरु की आज्ञा से रखना चाहिए।
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2. सबसे पहले नियम (पक्के संकल्प)
अपने आप से, या भगवान के सामने, साधारण शब्दों में ऐसा संकल्प लें:
- मैं 108 बार पार्श्वनाथ एकासन तप करूँगा/करूँगी।
- एकासन =
- दिन में केवल एक बार भोजन - एक ही बैठक में (bar-bar उठकर नहीं) - भोजन से पहले और बाद में भगवान का स्मरण
- पूरी अवधि में यथाशक्ति:
- सख़्त अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, संयम - झूठ, गाली, चुगली, क्रोध, टीवी/मोबाइल पर व्यर्थ समय – यथासंभव कम/बंद
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3. रोज़ सुबह की विधि (दैनिक पूजा / भक्ति)
- शुद्धि
- स्नान, साफ़ वस्त्र, मन को शांत करके पूजा स्थान पर बैठें।
- नवकार मंत्र
- कम से कम 9 / 27 / 108 बार नवकार मंत्र जपें (जितना संभव हो)।
- भगवान पार्श्वनाथ का स्मरण
यदि घर में पार्श्वनाथ की प्रतिमा / चित्र है तो: - द्रव्य पूजा कर सकें तो अच्छा (जल, चंदन, अक्षत, फल, दीप आदि) - नहीं कर सकते तो केवल दृष्टि पूजा और भक्ति से काम चल सकता है।
- विशेष जप / स्तुति (कोई एक या अधिक, अपनी परंपरा अनुसार):
- मंत्र: “ॐ ह्रीं श्री पार्श्वनाथाय नमः” – 108 बार - या “ऊवसग्गहरं पच्चियं …” (उवसगहरं स्तोत्र) – 1, 3 या 7 बार - या “श्री पार्श्वनाथ भगवान की चालीसा / स्तुति” यदि आपके यहां प्रचलित हो।
- संकल्प-पच्छिखन (एकासन का)
भगवान के सामने साफ शब्दों में बोलें (या मन में सोचें): - “आज मैं भगवान पार्श्वनाथ के नाम से एकासन तप करूँगा/करूँगी, पूरे दिन संयम रखूँगा/रखूँगी, किसी को दुःख नहीं दूँगा/दूँगी।”
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4. दिन भर का आचरण (Conduct during the day)
- अधिक से अधिक:
- कामकाज करते हुए भी भीतर से “जय जिनेन्द्र, पार्श्व प्रभु” का भाव रखें।
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5. एकासन कैसे करें?
एकासन = एक समय का भोजन
सामान्य जैन नियमों के अनुसार (अपनी परंपरा के अनुसार थोड़ा बदल सकता है):
- किस समय?
- अधिकांश लोग दोपहर में (जैसे 11–2 के बीच) एक बार भोजन लेते हैं। - सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले – अपने घर/संघ की रीति के अनुसार।
- एक ही बैठक
- थाली लेकर बैठ जाएँ, - जो-जो खाना है, अधिकतर एक साथ ले लें, - बीच में उठकर बार-बार लेना, कमरे बदलना, लंबा ब्रेक लेना – न हो, - उठ गए तो एकासन पूरा मान लें; फिर उस दिन कुछ न खाएं (केवल पानी, यदि अनुमत हो)।
- भोजन का प्रकार
यह अपने संप्रदाय/घर के नियम अनुसार हो, सामान्य रूप से: - शाकाहारी, जैन आहार (कंद-मूल टालें यदि आपकी रीति ऐसी है) - हिंसा-युक्त चीजें, शहद, अंडा, शराब, नशा आदि सख़्त वर्जित - बहुत तिखा, बहुत टेस्ट के लिए बनाना – तप की भावना के विरुद्ध - boil किया हुआ / साफ पानी – परंपरा के अनुसार निश्चित समय तक ही
- भोजन से पहले
- भगवान को नमस्कार, नवकार मंत्र, और संक्षिप्त प्रार्थना - “हे पार्श्व प्रभु, यह भोजन आपके द्वारा दिए हुए उपकार से है, मैं इसे तप की भावना से ग्रहण कर रहा/रही हूँ।”
- भोजन के बाद
- फिर से भगवान को नमस्कार - यदि संभव हो तो: - नवकार मंत्र, - “क्षमापना” – “आज के दिन यदि मुझसे किसी भी जीव को कष्ट पहुँचा हो तो क्षमा करें।”
- बाकी दिन
- भोजन के अलावा ठोस चीज़ न लें (फिर कुछ भी खाना नहीं, एक ही समय हुआ)। - पानी/दवा – अपने नियम और स्वास्थ्य के अनुसार, डॉक्टर व गुरु की सलाह लेकर।
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6. 108 दिन पूरे होने पर
जब 108 एकासन पूरे हो जाएँ:
- भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा / अभिषेक / अर्घ्य दें, जैसा आपके यहाँ प्रचलित हो।
- किसी दीन-दुखी, साधु-साध्वी, ज्ञान-स्थल (जिनमंदिर, पाठशाला आदि) को दान दें – यह तप का फल और पवित्र बनाता है।
- अंत में विनम्र प्रार्थना करें:
- “हे पार्श्व प्रभु, यदि इस तप में मुझसे कोई भूल हुई हो तो क्षमा करें, और मुझे सही मार्ग पर चलने की शक्ति देते रहें।”
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7. कुछ महत्वपूर्ण बातें
- स्वास्थ्य अच्छा न हो, तो जिद करके तप न करें।
- BP, शुगर, दवाई आदि वाले लोग डॉक्टर और गुरु दोनों से पूछकर ही शुरू करें।
- तप का असली फल:
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108 पार्श्वनाथ तप की छोटी सी जानकारी और संकेत-विदि यहाँ भी देख सकते हैं