Pakkhi kya hota hai
“Pakkhi” (अक्सर लिखा जाता है: पक्षी / पक्षी प्रतिक्रमण) शब्द Jain dharm mein आम तौर पर दो अर्थों में आता है:
- समय के रूप में – पक्ष / पखवाड़ा
- एक चाँद से दूसरे चाँद के बीच का आधा समय “पक्ष” कहलाता है। - एक महीने में दो पक्ष होते हैं: - शुक्ल पक्ष – अमावस्या से पूर्णिमा तक - कृष्ण पक्ष – पूर्णिमा से अमावस्या तक - इसे बोलचाल में “पखवाड़ा / पख्खी / pakkhi” भी कह देते हैं।
- जैन क्रिया के रूप में – पक्षी (Pakshik) Pratikraman
- जो प्रतिक्रमण हर पंद्रह दिन में, यानी हर पक्ष में किया जाता है, उसे “पक्षी प्रतिक्रमण (Pakshik Pratikraman / Pakkhi Pratikraman)” कहा जाता है। - मतलब: महीने में दो बार होने वाला विशेष आत्म-चिन्तन और प्रायश्चित्त का प्रयोग।
साधारण भाषा में:
- “Pakkhi” = 15 दिन का समय (एक पक्ष)
- और Jain लोग जब कहते हैं “pakkhi pratikraman” तो उसका मतलब होता है: