धर्म ध्यान करते आर्तध्यान करने वाले मुनि ka naam
धर्म ध्यान करते हुए आर्तध्यान करने वाले किसी मुनि का नाम नहीं मिलता, क्योंकि:
- धर्मध्यान और आर्तध्यान एक-दूसरे के विपरीत (विरोधी) अवस्थाएँ हैं।
- जो साधु सच में धर्मध्यान में है, वह उस समय आर्तध्यान कर ही नहीं सकता।
- और जो आर्तध्यान (दुःख, शोक, क्लेश वाला ध्यान) कर रहा हो, वह धर्मध्यान की अवस्था में नहीं माना जाता।
इसलिए ऐसा कोई उदाहरण “धर्म ध्यान करते आर्तध्यान करने वाले मुनि” के रूप में मान्य नहीं है। जैनागम के अनुसार एक समय में एक ही प्रकार का ध्यान होता है, दो विपरीत ध्यान एक साथ नहीं हो सकते।