18papasthanak in g
“18 pāpa-sthānak” का अर्थ है – जैन धर्म में बताए गए 18 पाप/पाप‑स्थान, जिनसे नरक आदि दुर्गति मिलती है और जिनका प्रायश्चित प्रतिक्रमण में किया जाता है। आपने “in g” लिखा है, तो नीचे इनका सरल रूप पहले हिन्दी + ब्रैकेट में आसान गुजराती उच्चारण के साथ दे रहा हूँ:
- प्राणातिपात – हिंसा, किसी भी जीव को कष्ट या हत्या
(prāṇātipāt – hinsā / jeev-hatyā)
- मृषावाद – झूठ बोलना
(mṛuṣhāvād – jhūṭh bolo)
- अदत्तादान – बिना अधिकार की वस्तु लेना, चोरी
(adattādān – chori, binā hakk nu levā)
- मैथुन / अब्रह्म – इन्द्रिय‑संयम का भंग, अशुद्ध स्त्री‑पुरुष व्यवहार
(maithun / abrahma – asanyam, kaām‑vikshep)
- परिग्रह – अधिक संग्रह, वस्तु‑व्यक्ति में आसक्ति
(parigrah – motāiṭlo sangrah, āsakti)
- क्रोध – गुस्सा, रोष
(krodh – guṣsō)
- मान – अभिमान, अहंकार
(mān – ahankār, ghamand)
- माया – छल‑कपट, धोखा देना
(māyā – chhal, kapat)
- लोभ – लालच, कभी तृप्त न होना
(lobh – lālach)
- राग – आसक्ति, ज़्यादा लगाव
(rāg – laġāw, moh)
- द्वेष – नफ़रत, घृणा
(dveṣh – dveṣh, nafrat)
- कलह – झगड़ा, लड़ाई‑झगड़ा करना
(kalah – jhagḍō)
- अभ्याख्यान – झूठा दोषारोपण, किसी पर गलत इल्ज़ाम लगाना
(abhyākhyān – jhūṭhō apavād)
- पैशुन्य – चुगली, लोगों में फूट डालने वाली बात
(paiśunya – chugli, phūṭ pāḍnār vāto)
- रति‑अरति – अनुचित liking‑disliking; जहाँ विरक्ति चाहिए वहाँ रति, और जहाँ रति चाहिए वहाँ अरति
(rati–arati – anuchit prīti ane aprīti)
- परपरिवाद – परनिंदा, पीठ पीछे बुराई करना
(par‑parivād – par‑nindā, bad‑bol)
- माया‑मृषावाद – चालाकी से झूठ बोलना, राजनीति‑भरा झूठ
(māyā–mṛuṣhāvād – chaturāī thi jhūṭh)
- मिथ्यात्व‑शल्य – गलत सम्यक‑दृष्टि, धर्म‑सत्य पर अविश्वास; कुसंयम की सूई‑जैसी चुभन
(mithyātva–śalya – mithyā‑darshan, khotī mān्यता)
संक्षेप में, ये 18 पाप‑स्थानक वही हैं जिनसे नरकादि दुर्गति के “द्वार” खुलते हैं और प्रतिक्रमण‑सूत्र में इन्हीं से दूर रहने का संकल्प कराया जाता है। अधिक विस्तार से सरल भाषा में पढ़ना हो तो आप यहाँ देख सकते हैं: