देव पद के कितने गुण होते हैं
जैन धर्म के अनुसार, देव पद (देवता या स्वर्गीय जीव का पद) के आठ मुख्य गुण माने गए हैं, जिन्हें "आठ प्रातिहार्य" कहा जाता है। ये गुण निम्नलिखित हैं:
- अचल (स्थिरता)
- अदृष्ट (अदृश्यता)
- अनुपम (अद्वितीयता)
- अवलोकन (सब कुछ देख सकने की शक्ति)
- स्वच्छंद गति (इच्छा अनुसार गति)
- कामरूपता (इच्छा अनुसार रूप परिवर्तन)
- अक्लेश्यता (कष्ट रहित)
- अभय (निर्भयता)
इन गुणों के माध्यम से देव पद की विशिष्टता को समझाया गया है। जैन ग्रंथों में देवों के इन गुणों का उल्लेख मिलता है, जो उन्हें अन्य जीवों से अलग और श्रेष्ठ बनाते हैं।