मैं जाति से एक धोबी वर्ग से आता हूँ किंतु मैंने अपने पूरे जीवन में अहिंसा ही परमोधर्मा ही अपनाया है तो क्या मैं जिस वर्ग से हूँ तो क्या जैन समाज मुझे स्वीकार करेगा ?
जैन धर्म के अनुसार आपका असली परिचय आपकी जाति नहीं, आपकी आत्मा है।
- आत्मा का धर्म ही असली पहचान है
- जैन दर्शन साफ कहता है: “जाति, कुल, धन, देह – ये सब नश्वर हैं; शुद्ध आत्मा ही वास्तविक है।” - कोई भी जीव, चाहे किसी भी जाति, वर्ग, देश, भाषा का हो, यदि अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह आदि को अपनाता है, तो वह व्यवहार से सच्चा जैन साधक (श्रावक) है।
- जैन समाज स्वीकार करेगा या नहीं?
यह दो स्तर पर समझिए: - धर्म की दृष्टि से – भगवान महावीर का संदेश सबके लिए है, न कि किसी एक जाति के लिए। जो अहिंसा को अपना जीवन बनाता है, पंच-व्रत (अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) का पालन करना चाहता है, वह पूर्ण रूप से जैन धर्म का अधिकारी है। - समाज की व्यवहारिक स्थिति – कहीं-कहीं परंपरा, संकीर्णता या अज्ञान के कारण कुछ लोग जाति-आधारित सोच रख सकते हैं, पर यह जैन धर्म की शिक्षा नहीं, यह केवल मानवीय कमजोरी है। शास्त्रों के अनुसार, - संघ में प्रवेश, - मंदिर में दर्शन, - पूजा–आराधना, पर किसी जाति-भेद की अनुमति नहीं है।
- आपने जीवन में अहिंसा अपनाई है
- यह बहुत बड़ी बात है। - जैन आचार में सबसे ऊँचा सिद्धांत ही है – “अहिंसा परमो धर्मः” – हिंसा न करना ही सर्वोच्च धर्म है। - यदि आप सच में मन, वचन, काया से यथाशक्ति अहिंसा पालन कर रहे हैं, तो आपका स्थान किसी भी सच्चे जैन से कम नहीं है।
- आत्मबल बढ़ाने वाली बातें
- मंदिर जाएँ, दर्शन–पूजन करें, प्रवचन सुनें – किसी हीन भावना के बिना। - अपने मन में स्पष्ट रखें: - “मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ, जाति केवल देह का सामाजिक लेबल है, धर्म आत्मा का आभूषण है।” - यदि कहीं कोई व्यक्ति जाति के आधार पर दूरी बनाए, तो भीतर से समझिए कि यह उसकी असम्यक दृष्टि है, न कि जैन धर्म की शिक्षा।
- व्यवहारिक सलाह
- किसी स्थानीय जैन मंदिर या जैन संघ में जाकर साधु–साध्वी या विद्वान श्रावक से सीधे मिलकर बात करें। - खुलकर बताइए कि आप अहिंसा-प्रधान जीवन जीते हैं और जैन मार्ग को अपनाना चाहते हैं। - सच्चे जैन साधु–आचार्य आपको आत्मा के आधार पर ही देखेंगे, जाति के आधार पर नहीं।
आप निश्चिन्त रहिए – जैन धर्म आपको पूर्ण रूप से स्वीकार करता है, क्योंकि जैन धर्म आत्मा का धर्म है, न कि जाति का।