Mahavir Swami ne Abhigrah
“Abhigrah” का मतलब है – दृढ़ निश्चय / कड़ा संकल्प, जो जिनेन्द्र भगवान बहुत विचार करके लेते हैं, और फिर किसी भी कीमत पर तोड़ते नहीं।
भगवान महावीर का प्रसिद्ध अभिग्रह (चन्दनबाला की कथा)
एक बार भगवान महावीर स्वामी ने ऐसा अभिग्रह लिया कि वे आहार (भोजन) सिर्फ ऐसे व्यक्ति के हाथ से ही लेंगे जो:
- राजकुमारी हो
- जिसका सिर मुंडा हुआ हो
- पैरों में बेड़ियाँ (ज़ंजीर) पड़ी हों
- एक पैर घर के भीतर और दूसरा बाहर हो
- आँखों से आँसू बह रहे हों
- हाथ में “बकाला” (एक प्रकार का दाना/चारा) से भरी टोकरी हो
- और साधु को आहार के लिए निमंत्रण दे रही हो
ऐसा व्यक्ति मिलना लगभग असंभव जैसा था – परन्तु तीर्थंकर का अभिग्रह केवल लोक-कल्याण के लिए होता है।
इसी क्रम में सती चन्दनबाला की कथा आती है:
- चन्दनबाला असली में राजकुमारी थी, आगे चलकर दासी की तरह कैद में रखी गयी।
- उसके सिर के बाल मुंडा दिए गए, पैरों में बेड़ियाँ डाल दी गयीं।
- एक दिन वह दरवाज़े पर खड़ी थी – एक पैर अंदर, एक बाहर; हाथ में बकाला से भरी टोकरी थी, और साधुओं को आहार के लिए बुला रही थी।
- जब भगवान महावीर वहाँ पहुँचे, उन्होंने देखा कि अभिग्रह की लगभग सभी शर्तें पूरी हैं, पर आँसू नहीं बह रहे।
- वे लौटने लगे, तो चन्दनबाला के मन में करुणा और भावुकता से आँसू बह निकले।
- तब भगवान ने समझा – अब मेरा अभिग्रह पूर्ण हुआ – और उन्होंने चन्दनबाला के हाथ से आहार ग्रहण कर अपना लंबा उपवास तोड़ा।
- उसी समय देवों ने आकाश से पुष्प-वृष्टि की, बेड़ियाँ टूट गयीं, उसका रूप तेजस्वी हो गया।
- आगे चलकर चन्दनबाला ने भगवान महावीर से दीक्षा ली और प्रथम गणिका / प्रमुख आर्यिका (महिला शिष्य) मानी गयीं।
आध्यात्मिक अर्थ
- अभिग्रह केवल जिद नहीं, बल्कि धर्म की साधना को और दृढ़ करने वाला संकल्प है।
- तीर्थंकर का हर अभिग्रह जीवों के कल्याण, करुणा और सम्यक् दर्शन को प्रकट करने के लिए होता है।
- चन्दनबाला की कथा से हमें दया, श्रद्धा, नम्रता और स्त्री–पुरुष दोनों के लिए समान मोक्ष-पथ का संदेश मिलता है।
यह कथा का वर्णन विभिन्न जैन आगमों और चरित्र–ग्रंथों में थोड़े बहुत विवरण–भेद के साथ श्वेतांबर और दिगंबर – दोनों परंपराओं में प्रसिद्ध है, लेकिन मूल भाव और महत्त्व – भगवान के अभिग्रह और चन्दनबाला की महानता – समान ही है।
इसी प्रसंग का संक्षिप्त उल्लेख कौशाम्बी तीर्थ के वर्णन में भी आता है, जहाँ बताया है कि भगवान महावीर ने ऐसा अभिग्रह लिया था और वहीं चन्दनबाला से आहार ग्रहण किया। आप यह संक्षिप्त जानकारी यहाँ और देख सकते हैं