Pat parampara swetambar
“Pat / Pattā Paramparā” का मतलब है – आचार्य‑संतों की गुरु‑शिष्य परंपरा (lineage), जो भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी से शुरू होकर आगे चलती है।
श्वेताम्बर में पट्ट‑परंपरा क्या है?
- श्वेताम्बर परंपरा में भी आचार्यों की अविच्छिन्न गुरुपरंपरा मानी जाती है।
- इसे कई जगह “पट्टावली / गुरुवावली / 79 पथ परंपरा” जैसे नामों से भी याद किया जाता है।
- यह परंपरा बताती है कि:
श्वेताम्बर परंपरा में विशेष रूप से:
- कल्पसूत्र के स्थविरावलि भाग में आचार्यों की शुरुआती वंशावली (गौतम स्वामी से आगे) दी गई है।
- आगे की बड़ी‑लंबी सूची अलग‑अलग पट्टावली‑ग्रन्थों में मिलती है; नामों के क्रम में विभिन्न गच्छों (जैसे तपा‑गच्छ आदि) के अनुसार थोड़ा‑बहुत अंतर भी होता है।
79 पथ / 79 पट्ट परंपरा (संक्षेप में)
जैन परंपरा में प्रचलित “79 पथ परमपरा” या “79 पट्टावली” से आशय वही गुरुपरंपरा है, जो:
- गौतम स्वामी से शुरू होती है,
- और लगभग 79 आचार्यों तक की श्रृंखला मानी जाती है।
यदि आप खास तौर पर:
- पूरी 79 आचार्यों की सूची (नाम‑दर‑नाम)
- किसी विशेष श्वेताम्बर गच्छ (जैसे तपा‑गच्छ, खर्तरगच्छ, आदि) की अलग‑अलग पट्टावली